पहली बार 37 कांस्टेबलों काे मिले जांच अधिकारी के पावर; दाे साल सजा वाले मामलाें की कर सकेंगे तफ्तीश

एसएसपी कैलाश चन्द्र बिश्नाेई ने साेमवार शाम काे आदेश जारी कर 37 कांस्टेबल काे अनुसंधान अधिकारी के पाॅवर देने का आदेश जारी किया है। यह कांस्टेबल आईपीसी-सीआरपीसी के उन मुकदमाें में अनुसंधान करेंगे जिनमें अधिकतम दाे साल की सजा हाे।

कांस्टेबल पुलिस लाइन में प्रशिक्षण और लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण हाेने के बाद यहां तक पहुंचे हैं। बड़ी बात यह है जिले में हर साल करीब 2500 मुकदमे ऐसे ही दर्ज हाेते हैं जिनमें अधिकतम 2 साल तक की सजा के प्रावधान है। इन मुकदमा का भार हेड कांस्टेबल और एएसआई के पास हाेता है। अब इन कांस्टेबल के हाेने से काम बंटेगा जिससे परेशानी नहीं हाेगी। बता दें कि पूर्व डीजीपी भूपेन्द्र यादव ने आदेश जारी कर कांस्टेबल काे अनुसंधान अधिकारी का पाॅवर देने की कहा था। इसके बाद जिले में प्रथम दाे बेच में 115 कांस्टेबल काे इसमें शामिल किया था। इनका पुलिस लाइन में एक माह का प्रशिक्षण शुरु हुआ।

प्रशिक्षण के दाैरान 32 कांस्टेबल का हेड कांस्टेबल में प्रमाेशन हाे गया जिससे वह इस प्रक्रिया से बाहर हाे गए। 68 कांस्टेबल ने प्रशिक्षण देने के बाद लिखित परीक्षा हुई। लिखित परीक्षा 400 नंबर के 4 प्रश्न पत्राें में जिन्हाेंने 50 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किया उनकाे चयनित किया गया। अन्य कांस्टेबल की फिर हाेगी परीक्षा : परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुए 31 कांस्टेबल की फिर से लिखित परीक्षा हाेगी। अगर दाैबारा परीक्षा में भी असफल हुए ताे फिर से प्रशिक्षण प्राप्त करना हाेगा और फिर लिखित परीक्षा तक पहुंचेगा।

परिवादियों को मिलेगा इसका फायदा
थानाें में हर साल दुर्घटना, मारपीट, जुआ अधिनियम, अवैध शराब, पुलिस एक्ट सहित अन्य मामलाें के हर साल 2500 मुकदमे दर्ज हाेते हैं। इनमें ज्यादा दुर्घटना और मारपीट के हाेते हैं। प्रत्येक हेड कांस्टेबल और एएसआई के पास 10 से भी ज्यादा फाइलें हाेती हैं, जिसमें लूट, चाेरी, हत्या का प्रयास जैसे बड़े मामलाें के साथ दुर्घटना, मारपीट के भी मामले हाेते हैं। ज्यादा मामले हाेने के कारण परिवादियाें काे समय नहीं दे पाते हैं जिससे परेशानी से गुजरना पड़ता है। कांस्टेबल में यह मामले बट जाएंगे ताे लाेड नहीं रहेगा।

निरंतर चलेगी प्रक्रिया : बताया कि नियम के अनुसार जिले के जाे भी कांस्टेबल सिनियरिटी में आने लायक है उनकाे इस प्रक्रिया में शामिल कर प्रशिक्षण और फिर लिखित परीक्षा दिलवाई जाएगी।



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Power of Investigating Officer found for 37 constables for the first time; Will be able to investigate cases involving punishment for two years


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