जयपुर के पूर्व राजपरिवार संपत्ति विवाद 34 साल में भी नहीं सुलझे, सुप्रीम कोर्ट रिसीवर 28 साल से कर रहे हैं संपत्ति की निगरानी

(संजीव शर्मा). जयपुर के पूर्व राजपरिवार की हफ (अविभाजित हिन्दू परिवार) की चल-अचल संपत्ति केे बंटवारे को लेकर 34 साल से दिल्ली हाईकोर्ट में दावा लंबित है। तीन दशक के बाद भी संपत्तियों के विवाद नहीं सुलझे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व राजपरिवार की हफ संपत्तियों के लिए 28 साल पहले 13 नवंबर 1992 को नियुक्त किए गए रिसीवर ही इनकी देख-रेख कर रहे हैं।

सभी संपत्ति विवाद केसों से पूर्व राजपरिवार सदस्य पृथ्वीराज सिंह भी जुड़े हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले पूर्व राजपरिवार की इन संपत्तियों पर गुजरात के रिटायर सीजे बीजे. दीवान को रिसीवर नियुक्त किया। 9 मई 1995 को एमपी हाईकोर्ट के रिटायर न्यायाधीश जस्टिस यूएन.बाछावत को और बाछावत की मृत्यु 20 नवंबर 2016 को होने के बाद 24 अप्रैल 2017 को दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस एसके मिश्रा को रिसीवर नियुक्त किया। पूर्व राजपरिवार की संपत्तियों की देखरेख व निगरानी के लिए एडवोकेट राजेश कर्नल को 20 दिसंबर 2004 को ऑफिसर इंचार्ज ऑफ रिसीवर प्रोपर्टी नियुक्त किया और वे तब से ही इस पर पर कार्यरत हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट में इन संपत्तियों पर लंबित है विवाद
जयपुर हाउस- दिल्ली, जयपुर हाउस- माउंट आबू, विमान भवन के बाहर की जमीन- सवाई माधोपुर, राजमहल पैलेस के बाहर की ओपन लैंड, रामबाग स्टाफ क्वार्टर, रामबाग पैलेस के सामने का बंगला, हाउस ऑफ गैराज-बंगला नंबर 37 (लक्ष्मीविलास होटल) , बंगला नंबर-37, रामबाग कंपाउंड (जिसमें हवेली, नर्सरी क्वार्टर, अस्तबल, पोलो पैवेलियन ) तख्तेशाही रोड पर मोती डूंगरी का हिल एरिया, बंगला संख्या- 6 ईसरदा पैलेस, बंगला नंबर-7, ओपन लैंड निअर हाउस होल्डिंग फ्लैट्स, लैंड नार्थ ऑफ एसएमएस भवानी सिंह रोड, लैंड अराउंड रामबाग पैलेस होटल, लैंड अपोजिट राजस्थान कैनाल बोर्ड (अमरुदों का बाग ), लैंड अराउंड रामबाग क्वार्टर (आरामगाह), रामगढ की जमीन शामिल हैं।
पूर्व राजपरिवार के संपत्ति विवाद ऐसे पहुंचे दिल्ली हाईकोर्ट
हफ संपत्तियों पर महाराज जगत सिंह ने 1986 में दिल्ली हाईकोर्ट में दावा किया था। दावा का कारण दिल्ली स्थित जयपुर हाउस था। इस कारण हफ संपत्ति के विवाद दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित इस दावे में ही समाहित हो गए। यह दावा जगत सिंह बनाम भवानी सिंह के नाम से लंबित है।
जयपुर मेट्रो कोर्ट में भी लंबित हैं मुकदमे
जयपुर मेट्रो की कई जिला व सेशन कोर्ट में गायत्री देवी की संपत्तियों पर कब्जा और पूर्व राजपरिवार से जुड़े उत्तराधिकार व संपत्ति, वसीयत और लिलीपूल पर कब्जे के कई विवाद कोर्ट में लंबित चल रहे हैं। इन मुकदमों से पूर्व राजपरिवार सदस्य पृथ्वीराज सिंह भी जुड़े हुए हैं। इन मुकदमों में एडवोकेट रामजीलाल गुप्ता उनकी पैरवी कर रहे हैं।
गायत्री देवी की मृत्यु के साथ ही सामने आए संपत्ति विवाद

पूर्व राजमाता गायत्री देवी की जुलाई 2009 में मृत्यु के साथ ही संपत्तियों पर कब्जा और उत्तराधिकार, वसीयत और लिलीपूल पर कब्जे के विवाद आए। पृथ्वीराज सिंह व उर्वशी देवी ने गायत्री देवी के पोते-पोतियों देवराज व लालित्या के खिलाफ मामले में गायत्री देवी के उत्तराधिकार प्रमाण पत्र वसीयत को दावे के जरिए चुनौती दे रखी है। इसके अलावा लिलीपूल पर कब्जे के अधिकार के मामले में होटल रामबाग पैलेस होटल की ओर से भी कोर्ट में दावा कर रखा है। इसके अलावा देवराज व उनकी बहन लालित्या ने गायत्री देवी की वसीयत के प्रोबेट प्राप्त करने का दावा कर रखा है।



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