नगरपरिषद द्वारा मिर्जेवाला मार्ग स्थित नंदीशाला में बड़े स्तर पर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। नंदीशाला में न ताे कर्मचारी समय से ड्यूटी दे रहे थे और न ही पशुओं काे समय से हरा चारा दिया जा रहा है। इतना ही नहीं अव्यवस्थाओं के आलम के चलते पिछले काफी दिनों से निरीह पशुओं के मरने की संख्या भी बढ़ गई थी। यह सब खामियां मंगलवार काे सभापति करूणा चांडक व आयुक्त प्रियंका बुडानिया द्वारा नंदीशाला के औचक निरीक्षण के दाैरान सामने आईं। हैरानी की बात यह रही कि निरीक्षण में पर पहुंचे सभापति आयुक्त काे माैके पर एक भी कर्मचारी नहीं मिला। इस पर माैके से ही फाेन कर कर्मचारियाें काे नंदीशाला बुलाया गया। ड्यूटी पर माैजूद नहीं हाेने का कारण पूछा ताे संताेषजनक जवाब नहीं मिला।
नंदीशाला में व्याप्त अव्यवस्थाओं और कर्मचारियों की लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सभापति चांडक ने संबंधित कर्मचारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए। इस पर आ युक्त ने लिपिक प्रवीण सिवाल व धीरज कुमार तथा टिंडल चुन्नीलाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन काल के दौरान मुख्यालय भी अनूपगढ़ व रायसिंहनगर नगर पालिका किए गए हैं। जानकारी के अनुसार सभापति करुणा चांडक को पिछले काफी दिनों से नंदीशाला की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें मिल रही थी।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सभापति ने आयुक्त काे साथ लेते हुए दोपहर करीब 12:30 बजे नंदीशाला पहुंची। उस समय वहां कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। इन्हें टेलीफोन के जरिए नंदीशाला बुलाया गया। जांच में पाया गया कि नंदीशाला में न तो नियमित रूप से सफाई की जा रही है और ना ही गोवंश को समय पर हरा चारा दिया जाता है।
नंदीशाला में व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाए गए बाबुओं और कर्मचारियों द्वारा पिछले काफी समय से हरे चारे से संबंधित रिकॉर्ड भी संधारित नहीं किया गया था। न ही पशु चिकित्सक के माध्यम से पशुओं के नियमित स्वास्थ्य जांच करवाई जा रही थी। आयुक्त ने बताया कि इन कर्मचारियों को नियमित रूप से नंदीशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए पाबंद किया गया था लेकिन पिछले काफी समय से इनके द्वारा किसी भी प्रकार की कोई सूचना नहीं दी गई।
काम के प्रति उदासीनता बरतने के आरोप में लिपिक प्रवीण सिवाल व धीरज कुमार को पहले भी निलंबित किया गया था। इनके द्वारा अपनी कार्यशैली सुधारने को लेकर दिए गए लिखित पत्र पर इन्हें बहाल कर नंदीशाला में व्यवस्था संचालन का दायित्व सौंपा गया था। लेकिन इसके बाद भी सुधार नहीं हुअा।
प्रियंका बुडानिया, आयुक्त।
सनातन धर्म में गोवंश हमेशा से पूजनीय है और इनकी सेवा का दायित्व नगरपरिषद द्वारा लिया गया है। नगरपरिषद के कर्मचारियों द्वारा ही जब सेवा भाव के तहत काम नहीं किया जा रहा तो यह मामला और भी अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है। सेवा भाव में कोताही बरतने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
करूणा चांडक, सभापति।
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