प्रदेश की सरकारी बिजली कंपनियों में टेक्निकल हेल्परों की भर्ती के लिए बेरोजगार आंदोलन कर रहे है, वहीं जयपुर, जोधपुर व अजमेर डिस्कॉम नई भर्ती करने के बजाए 2 हजार से ज्यादा ग्रिड सब स्टेशन (जीएसएस) को चलाने के लिए कॉन्ट्रेक्टरों को ठेके पर दे रहा है। जयपुर व जोधपुर डिस्कॉम ने 1650 जीएसएस को ठेके पर देने के लिए टेंडर भी लगा दिए है।
इस पर सालाना 80 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके लिए टीडब्ल्यू विंग ने टेंडर मांगे है। जयपुर डिस्कॉम में 1384 ग्रिड सब स्टेशनों को 50 करोड़ रुपए में ठेके पर दिया जा रहा है। यानि एक कर्मचारी एक शिफ्ट में काम करेगा। ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला का कहना है कि आईटीआई डिग्रीधारी युवा टेक्निकल हेल्पर भर्ती के पाठ्यक्रम में बदलाव की मांग कर रहे थे। ऐसे में ऊर्जा प्रमुख सचिव को नया पाठ्यक्रम तय कर भर्ती प्रक्रिया जल्दी करने के निर्देश दे रखे है। जल्दी ही टेक्निकल हेल्परों की भर्ती की जाएगी।
जीएसएस संचालन में टैरिफ आदेश की पालना नहीं
आरईआईसी ने 6 फरवरी 2020 को जारी टैरिफ ऑर्डर में यह आदेश दिया था कि ठेके पर दिए ग्रिड सबस्टेशन (जीएसएस) की जांच करने और वहां पर लगे ठेकाकर्मियों की मॉनिटरिंग करने के लिए कहा था। डिस्कॉम से जुड़े कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि 30 हजार रुपए महीने में ठेके पर चार कर्मचारी रखने है। तीन पारियों में तीन कर्मचारी होने चाहिए तथा कोई छुट्टी पर होने एक अतिरिक्त कर्मचारी हो। एक ठेकाकर्मी को एक महीने का 10 हजार रुपए से भी कम भुगतान किया जा रहा है।
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