चित्तौड़गढ़ में राज्य की पहली 29 किस्म के सीताफल की नर्सरी, जिले के 10 हजार किसान इस खेती से जुड़ेंगे

शहर के निंबाहेड़ा मार्ग पर पांच हैक्टेयर में बन रहे राज्य के पहले सीताफल उत्कृष्ठता केंद्र का शुक्रवार को राज्य के सीएम अशोक गहलोत ने कृषि मंत्री की मौजूदगी में वर्चुअल लोकार्पण किया। 10 करोड़ के इस प्रोजेक्ट पर अभी पांच करोड़ 42 लाख के कार्यों का उदघाटन सीएम अशोक गहलोत ने किया।


सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फाॅर कस्टर्ड एपल-सीताफल प्रोजेक्ट के तहत पांच हैक्टेयर में से दो हैक्टेयर पर सिविल कार्य हो रहे हैं। तीन हैक्टेयर में देश-विदेश की सीताफल की 29 वैरायटी यहां लगाई है। 1133 पौधे लगाए हैं। कृषि उपनिदेशक सीताफल प्रोजेक्ट राजाराम सुखवाल ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत दस करोड़ का यह प्रोजेक्ट है। इसमें साढ़े पांच करोड़ के कार्य अभी हुए हैं। शेष पांच करोड़ में ग्रीन व पोली हाउस, टेक्नीकल कार्य, नर्सरी विकास आदि कार्य होंगे। नर्सरी लगा दी गई है। इसमें 10 हजार पौधे तैयार करने के लिए ग्राफ्टिंग कर दी गई है। यह प्रोजेक्ट तीन साल में मूर्तरूप लेने जा रहा है। अगले साल फरवरी में किस्मों को किसानों को देना शुरू किया जाएगा।

सब कुछ ठीक रहा तो अगली बारिश तक सीताफल की नई वैरायटी आ जाएगी। ऑनलाइन उदघाटन समारोह की अध्यक्षता कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने की। विशिष्ट अतिथि राज्यमंत्री भजनलाल जाटव रहे। कलेक्ट्रेट के वीसी रूप में कलेक्टर केके शर्मा, एसपी दीपक भार्गव, सभापति संदीप शर्मा, उपसभापति कैलाश पंवार, कृषि उपनिदेशक सीताफल राजाराम सुखवाल मौजूद रहे। उपनिदेशक राजाराम सुखवाल ने बताया कि सीताफल उत्कष्ठता केंद्र दो पार्ट में बना है। इसमें 4.14 चार करोड़ रुपए सिविल वर्क में तथा शेष 6 करोड़ प्लांटेशन व सोलर सिस्टम आदि पर खर्च हुए।

सीताफल का गुदा आइसक्रीम व रबड़ी में उपयोग होगा... उपनिदेशक राजाराम सुखवाल ने बताया कि सेंटर में एक प्रोसेसिंग लैब और बन रही है। उत्पादन के बाद सीताफल का पल्प अथवा गुदा संरक्षित रखा जाएगा ताकि अलग-अलग उत्पादों के लिए प्रयोग में लिया जा सके। सीताफल के गुदे अथवा पल्प को आइसक्रीम, जूस, शर्बत, रबड़ी सहित कई मिठाइयाें में फ्लेवर व पोषक तत्व के रूप में प्रयोग किया जाएगा।

चित्तौड़ दुर्ग सीताफल के नाम से पैटेंट होगा
चित्तौड़गढ़ की पहचान सीताफल से भी है। इसलिए यह प्रोजेक्ट किसानों के साथ अन्य लोगों के रोजगार का जरिया भी बनेगा। सदियों से जिस चित्तौड़ दुर्ग के सीताफल की पहचान देश-दुनिया में है, अब वह चित्तौड़ दुर्ग सीताफल के नाम से पैटेंट होने जा रहा है। अब चित्तौड़गढ़ प्रदेश में एकमात्र ऐसी जगह होगी, जहां सबसे ज्यादा 50 तरह की वैरायटी के सीताफल तैयार होंगे। हालांकि पहले फेज में 29 वैरायटी लगाई गई है। कृषि विज्ञान केंद्र में बालानगर व अरकासहन सीताफल को ग्राफ्टेड कर आठ से दस हजार पौधे तैयार भी कर लिए हैं।


अभी सीताफल केंद्र में कोविड अस्पताल
निंबाहेड़ा मार्ग पर अभी सीताफल केंद्र में काेविड अस्पताल है। वैक्सीन आने के बाद यहां अस्पताल बंद हो जाएगा। फिर सीताफल उत्कृष्ठता केंद्र विधिवत शुरू हो जाएगा। आठ माह पूर्व यहां गड्‌ढे खोदकर सीताफल पौधरोपण शुरू कर दिया है। दक्षिण भारत व गुजरात आदि से 29 वैरायटी के पौधे लाकर लगाए हैं। ऑटोमेशन से अलग-अलग ब्लाॅक में पौधे लगाकर इसे कम्प्यूटर सिस्टम से जोड़ दिया है। इससे इनमें खाद-बीज व पानी की जरूरत का ऑनलाइन पता चलता रहेगा।

राज्य के अन्य चार जिलों में भी होती है सीताफल की खेती ... सीताफल उत्कृष्ठता केंद्र में प्रशासनिक भवन, किसान हाॅस्टल व स्टाफ क्वार्टर, चाैकीदार रूम, हाईटेक नर्सरी, ग्रीन हाउस, पाली हाउस, फार्म पोंड, वर्मी कंपोस्ट, पैक हाउस एंड पोस्ट हार्वेस्ट मशीनरी, स्वचलित ड्रिप सिंचाई सयंत्र, फर्टिगेशन आदि हैं। उपनिदेशक राजाराम सुखवाल बताते हैं कि चित्तौड़ दुर्ग के सीताफल की पहचान सबसे अलग है। राजसमंद, उदयपुर, झालावाड़, डूंगरपुर और महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश में भी इसकी खेती होती है।



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In Chittorgarh, the state's first 29 varieties of Sitaphal nursery, 10 thousand farmers of the district will join this farming


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