हाईवे किनारे बायो-डीजल बी-100 के नाम पर अन्य राज्यों से लाए जा रहा अन्य तेल पदार्थ बेचा जा रहा है। जिले में एक-एक कर दो दर्जन अवैध पंप स्थापित हो चुके हैं, वहीं 14 पंप और लगने वाले हैं। बायो डीजल के नाम पर अन्य ऑयल या नकली डीजल बेचकर उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी और बिना सुरक्षा उपाय आमजन के लिए खतरा तो किया ही जा रहा है, सरकार को भी राजस्व नुकसान हो रहा है। भास्कर द्वारा जुटाई जानकारी के अनुसार प्रतिदिन जिले से करीब 50 लाख और प्रदेश से 15 करोड़ का टैक्स चोरी हो रहा है। यानी राज्य सरकार को हर महीने करीब 500 करोड़ का राजस्व नुकसान हो रहा है।
पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ने के बीच कुछ समय से बायो डीजल बेचने के नाम पर पंप या आउटलेट खुलने की होड़ मच गई।
जिले में ऐसे करीब 25 पंप मंगलवाड़, कीर की चौकी, शंभूपुरा, निम्बाहेड़ा, डेट सहित भीलवाड़ा मार्ग बाइपास आदि जगहों पर बाकायदा पंप संचालित कर या इसी तरह की तैयारी के साथ बिक्री शुरू हो गई। हालांकि मामला ध्यान में आने के आदेश के बाद जिला रसद विभाग भी हरकत में आ गया। करीब आधा दर्जन पंप पर कार्रवाई भी की। ऐसे पंप पेट्रोल-डीजल डीलर्स के लिए भी चिंता का कारण बनता जा रहा है।
सरकार को पत्र भेजे: जिला पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कर्नल रणधीरसिंह, सचिव महावीर जैन के अनुसार इस मामले में सीएम, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव वित्त को पत्र लिख चुके हैं। जनप्रतिनिधियों के जरिये भी ज्ञापन भेजे।
जिले में एक ही दिन में तीन जगह अवैध बायो डीजल आउटलेट्स पर कार्रवाई, तीनों सील किए
जिले में मंगलवार काे डीएसओ विनयकुमार शर्मा के नेतृत्व में तीन बायोडीजल अवैध आउटलेट्स पर कार्रवाई की गई। निंबाहेड़ा क्षेत्र के साकरिया में नेशनल हाईवे पर होटल शेखावटी के परिसर में बायोडीजल आउटलेट पर निरीक्षण किया। बायोडीजल आउटलेट के संचालक मैनेजर मिटठूसिंह आउटलेट के पंजीकरण संबंधी दस्तावेज मांगने पर दस्तावेज नहीं होना बताया। आउटलेट के दोनों नोजल सील किए। मडडा चौराहा होटल एनके चौधरी परिसर में बायोडीजल आउटलेट के निरीक्षण में बायोडीजल के आउटलेट को पूर्व में ही हटा लिया गया था।
वर्तमान में वहां बायोडीजल की बिक्री नहीं होना पाया गया। शाम पांच बजे लक्ष्मीपुरा रिठाेला चित्तौड़ बाइपास पर होटल ममता के पास देविका बायोडीजल फिलिंग स्टेशन पर कार्रवाई की। मौके पर बायोडीजल आउटलेट के मालिक राजेश खटीक द्वारा भी पंजीकरण संबंधी कोई भी दस्तावेज नहीं होना स्वीकार करने पर पंप के दोनों नोजल सील किए। प्रवर्तन अधिकारी हितेश जोशी, मनजीतसिंह व प्रवर्तन अधिकारी सुश्री ज्योति खटीक शामिल रहे।
उपभोक्ताओं से धोखा: रतनजोत के बीज से बनता है बायोडीजल, यहां अन्य पदार्थ
बायोडीजल रतनजोत के बीज से बनता है। जिसे भारी वाहनों में प्रदूषण रोकने के लिए पेट्रोल और डीजल के कनवर्जन के रूप में लागू किया गया है। अभी जिस उत्पादों को बायो डीजल के नाम से घनत्व 860 से 900 बताकर बेचा जा रहा है, असल में उसका घनत्व भी 836.6 आ रहा है। ये ज्यादातर गुजरात में उत्पादित हो रहा है। वहां सरकार ने इसके प्रचलन व उपयोग पर रोक लगा दी तो अब पडौसी राजस्थान में इसे बायो डीजल के नाम से फैलाया जा रहा है। जबकि ये बेस आयल, वाइट आयल और लिक्वड पेराथीन आयल जैसे पदार्थ बताए जाते हैं। जिनको हेवी ट्रक या ट्रेलर के साथ बसों, कारो, जीपों या अन्य वाहनों में भी उपयोग में लिया जा रहा है।
सरकार से धोखा: 28 फीसदी वैट की बजाय जीएसटी से ही काम चला रहे
राजस्थान में पेट्रोल-डीजल पर 28 प्रतिशत वैट है जबकि अन्य आयल पदार्थों पर सिर्फ जीएसटी है। अवैध कारोबारी राजस्थान में वाइट आयल, बेस आयल आदि की डिमांड बताकर इन्हें अन्य राज्यों से जीएसटी पर ला रहे और बायो डीजल के नाम से बेच रहे हैं। भास्कर को प्राप्त पुख्ता जानकारी के अनुसार इस समय अकेले चित्तौड़गढ़ जिले में इस नकली बायोडीजल की बिक्री प्रतिदिन करीब 10 हजार लीटर है। इससे सरकार को 28 प्रतिशत वैट नहीं मिलने से प्रतिदिन 50 लाख और महीने का देखे तो करीब 15 करोड़ का नुकसान हो रहा। इसी को औसत मान ले तो पूरे प्रदेश के सभी 33 जिलों को मिलाकर राज्य सरकार को प्रति महीने 500 करोड़ का राजस्व नुकसान हो रहा हैं।
आमजन को खतरा: रातों रात ऐसे खुल रहे अवैध पंप, सुरक्षा उपायों का भी इंतजाम नहीं
बायो-डीजल पंप के नाम से किसी ढाबे या फोरलेन किनारे जमीन पर गढढा खोदकर टैंक बना रहे या या लोहे का टैंक रखकर उसमें पदार्थ भर दिया जाता है। जो पंप मार्केट या कबाड में रिप्लेस अथवा बेकार मानकर पहुंच रहे हैं उन्हें ऐसे पंप पर लगा दिया जाता है। कोई भी नया पेट्रोल-डीजल पंप लगाने के लिए कम से कम ढाई से तीन करोड़ की लागत आती है। लेकिन ये पंप 40-50 लाख के खर्चे में लग रहे हैं। अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ श्रेणी में आने से जिन सुरक्षा उपायों व मापदंडों की पालना जरूरी होती है, वो भी नहीं है। ऐसे में यदि किसी समय कोई हादसा हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा? और आमजन को बचाना कितना मुश्किल होगा।
- 12 से अधिक विभागों से लेने पड़ते है लाइसेंस या एनओसी
- 10 हजार लीटर आयल प्रतिदिन बिक्री जिले में
- 15 करोड़ रुपए प्रति महीने राजस्व हानि हो रही चित्तौड़ जिले में
- 500 करोड़ प्रति महीने का नुकसान सभी जिलों से
पता चलते ही सीज कर रहे हैं ऐसे पंप: डीएसओ शर्मा
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के शासन सचिव नवीन जैन के निर्देशानुसार जिले में रसद विभाग भी हरकत में आया है। ऐसे तीन पंपों को एक सप्ताह में सीज किया जा चुका है। डीएसओ विनय कुमार शर्मा ने भी माना कि इन पंप संचालकों से अनुमति के बारे में पूछने पर कोई पत्र नहीं बता पाता है। कार्रवाई जारी रहेगी।
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