अंशुल कुमार उत्तराखंड की सबसे ऊंची चोटी केदार कंठा पार फतह कर तिरंगा फहराकर भरतपुर का पहला पर्वतारोही बन गया है। उसने -8 डिग्री तापमान में 12 हजार 500 फुट केदार कंठा की चोटी पर चढ़कर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहराकर पर्वतारोही होने का गौरव हासिल किया है।
अंशुल ने यह उपलब्धि अपने जुनून और जज्बे के साथ हासिल की है।
इंटरनेशनल एडवेंचर फाउंडेशन मे वह वर्तमान में प्रशिक्षण ले रहे हैं। अंशुल ने इस रिकॉर्ड का श्रेय संस्था के सचिव विवेक चौरसिया को दिया है, क्योंकि उनके द्वारा दिए गए हौसले के कारण ही वे इस मुकाम तक पहुंच पाए। अंशुल ने बताया कि केदार कंठा की चोटी तक पहुंचने का रास्ता बेहद ही खतरनाक था।
और स्नोफाॅल व रॉकफॉल जैसी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। इन सभी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी पीक पर तिरंगा लहराकर सफलता अर्जित की। शहर की वैद्य कॉलोनी में रहने वाले अंशुल कुमार ने बताया कि वे करीब 20 किलोमीटर की चढ़ाई कर 22 घंटे में केदार कंठा की चोटी पर 25 दिसंबर को पहुंच गए। और उसके बाद उसी शाम को वापस नीचे उतर आए। चढ़ते वक्त 10 किलोमीटर का सफर कर नाइट कैंप पहाड़ी पर ही किया था।
उन्होंने बताया कि चोटी पर तिरंगा लहराने के बाद नीचे सुरक्षित उतरकर मुझे गौरव महसूस हुआ। बताते चलें कि अंशुल की उम्र महज 23 साल है, वह ग्रेज्युएशन के बाद पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कर चुका है। डिप्लोमा करने के दौरान ही उसके क्लास मेट विवेक चौरसिया ने उन्हें ऐसा कुछ करने को प्रेरित किया था।
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