19 सरकारी स्कूलाें का रजिस्ट्रेशन करवाने के बदले कनिष्ठ सहायक चाय की थड़ी पर ‌9500 रुपए रिश्वत लेते पकड़ा गया

भ्रष्टाचार निराेधक ब्यूराे की स्पेशल यूनिट ने सहकारिता विभाग में उप रजिस्ट्रार ऑफिस के कनिष्ठ सहायक काे 19 सरकारी स्कूलाें का रजिस्ट्रेशन करवाने के बदले 9500 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आराेपी ने यह रिश्वत ऑफिस के पास चाय की थड़ी पर ली, जहां ब्यूराे की टीम ने उसे पकड़ लिया।

एसीबी के एएसपी रजनीश पूनिया ने बताया कि नाेखा तहसील की 19 सरकारी स्कूलाें का रजिस्ट्रेशन करवाया जाना था। स्कूल की प्रबंध समिति और विकास प्रबंध समितियाें ने रावतसर के एनजीओ मनकी उड़ान फाउंडेशन के जरिये सहकारिता विभाग में उप रजिस्ट्रार ऑफिस में आवेदन किया। एनजीओ संचालक संदीप कालेरा ने ऑफिस के कनिष्ठ सहायक रामपुरा बस्ती की गली नंबर दाे में माताजी मंदिर के पास रहने वाले वियजपालसिंह (32) से संपर्क किया ताे उसने प्रत्येक स्कूल के 500 रुपए के हिसाब से 9500 रुपए की रिश्वत मांगी।

संचालक ने अपने कर्मचारी बलवंत के जरिये एसीबी काे शिकायत की। एसीबी ने शिकायत का सत्यापन करवाया। मंगलवार काे बलवंत रिश्वत की राशि लेकर व्यास काॅलाेनी स्थित सहकार भवन पहुंचा। विजयपालसिंह ने ऑफिस के बाहर चाय की थड़ी पर उससे 9500 रुपए लिए और अपनी पेंट की पीछे वाली जेब में डाल लिए। इस दाैरान एसीबी की स्पेशल यूृनिट के इंस्पेक्टर दिलीप खत्री की टीम ने उसे दबाेच लिया और रिश्वत की राशि बरामद कर ली। एसीबी की टीम में इंस्पेक्टर अनिल शर्मा, आनंद गिला, हेड कांस्टेबल बजरंगसिंह, मंगतुराम, राजेश कुमार, प्रेमचंद, कांस्टेबल गजेन्द्रसिंह, याेगेन्द्रसिंह शामिल थे।
आराेपी ने परिवादी के माेबाइल नंबर तलाशकर उसे बुलाया
ऑनलाइन आवेदन के कारण परिवादी सहकारिता विभाग के ऑफिस नहीं गया। ऑनलाइन आवेदन किए और जाे कमियां निकाली जा रही थीं, उसकी पूर्ति भी ऑनलाइन की गई। आराेपी ने स्कूलाें में और अन्य जगह संपर्क कर परिवादी के माेबाइल नंबर हासिल किए। उससे फाेन पर बात कर बुलाया और रिश्वत मांगी।

ऑनलाइन आवेदन, बार-बार निकाली कमियां
सरकार की मंशा है कि ज्यादातर काम ऑनलाइन हाें जिससे कि भ्रष्टाचार में कमी अाए। लेकिन, घूसखाेराें पर इसका काेई असर नहीं है। उप रजिस्ट्रार, सहकारिता समितियां ऑफिस में सरकारी स्कूलाें का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए किए गए आवेदनाें में बार-बार अलग-अलग कमियां निकाली गईं। एक कमी की पूर्ति करने के बाद फिर से दूसरी कमी निकाल दी जाती। जानबूझकर परेशान किया गया और फिर प्रत्येक स्कूल का रजिस्ट्रेशन करवाने के बदले 500 रुपए की रिश्वत ली गई।



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