बड़े शहरों की तर्ज पर बीकानेर में भी मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी यानी एमआरएफ सेंटर बनेगा। इससे शहर में जगह-जगह कचरा उठाने वालों को एक ही जगह काम मिल जाएगा। कचरा चुगने के बदले उन्हें पैसा भी मिलेगा। एमआरएफ सेंटर के लिए बल्लभ गार्डन डंपिंग साइट पर कमरे बनाए जाएंगे। नगर निगम ने 96 लाख रुपए के टेंडर पर वर्कऑर्डर जारी कर दिए हैं। पिछले करीब डेढ़ साल से ये काम अटका था।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के फैसले की पालना में देशभर के निकायों को एमआरएफ सेंटर का निर्माण कराना अनिवार्य है। उसी रेफरेंस में नगर निगम ने बल्लभ गार्डन डंपिंग साइट पर सेंटर तैयार करना तय किया है। एनजीटी के मापदंडों को ध्यान में रखते हुए प्रथम चरण में बिल्डिंग निर्माण पर 96 लाख रुपए खर्च होंगे। यहां कचरे को 16 श्रेणियों में बांटकर रखा जाएगा। यह काम कबाड़ी या किसी ऐसी संस्था को दिया जाएगा, जो शहर में कचरा बीनने वाली महिलाओं-पुरुषों से काम करवा सके।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत कचरा निस्तारण के लिए मशीन भी लगाई जाएगी। सबसे पहले सूखा कूड़ा अलग करेंगे। प्लास्टिक, लोहा और दूसरी धातुओं को अलग कर रिसाइकल करेंगे या सीधे बाजार में बेचकर आय अर्जित करेंगे। शेष बचे गीले कूड़े से खाद बनाकर किसानों को बेचने की योजना है। इससे जगह-जगह लगने वाले कूड़े के ढेर की समस्या खत्म हो जाएगी। नगर निगम क्षेत्र से डंपिंग यार्ड की समस्या का भी स्थायी समाधान हो जाएगा।
नोखा में बन चुका है सेंटर, देशनोक-श्रीडूंगरगढ़ में चल रहा काम
बीकानेर संभाग में 6 निकायों पर एमआरएफ सेंटर तैयार हो चुके हैं। बाकी जगह प्रोसेस में है। नोखा में सबसे पहले सेंटर बना था। श्रीडूंगरगढ़ और देशनोक में काम शुरू हो गया है। नगर निगम सबसे पीछे है। 2019 में तत्कालीन आयुक्त डॉ. प्रदीप गवांडे ने एमआरएफ सेंटर का खाका तैयार किया था लेकिन निगम के पास डंपिंग यार्ड नहीं था। कुछ स्थानों पर प्रयास भी किए लेकिन स्थानीय लोगों का विरोध झेलना पड़ा। अब एनजीटी की गाइडलाइन पर अमल शुरू हुआ है।
^एमआरएफ सेंटर पर निर्माण के वर्क ऑर्डर कर दिए हैं। एमआरएफ सेंटर में आधुनिक मशीनें होंगी। वहां कचरे को 16 श्रेणियों में छांटने की प्रोसेसिंग करेंगे। गीले कचरे से जैविक खाद बनाएंगे।
-सुशीला कंवर राजपुरोहित, महापौर
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