सेड़वा क्षेत्र के खेताें में 12 से अधिक अवैध कपड़ा धुलाई फैक्ट्रियां खुली, खेतों में ही केमिकल निस्तारित

सरहदी गांवों के कई कृषि कुओं पर रंग बिरंगे कपड़े सूखते दिखाई देते हैं। यह कपड़े इन बेरों पर चल रही अवैध कपड़ा धुलाई फैक्ट्रियाें के हैं। सेड़वा क्षेत्र के कई गांवों में लॉकडाउन के बाद अवैध कपड़ा धुलाई फैक्ट्रियां संचालित हो रही है। धुलाई के बाद निकलने वाला दूषित पानी खेतों को खराब कर रहा है।

बालोतरा क्षेत्र के आसपास धुलाई केंद्रों के पास दूषित पानी एकत्रित करने के लिए प्लांट लगे हुए है। इसके बावजूद वहां की जमीन पर इसका गहरा असर है। जबकि सेड़वा क्षेत्र के इन गांवों में संचालित होने वाली इन अवैध धुलाई केंद्रों पर सभी नियम ताक पर रखे हुए है।

बालोतरा क्षेत्र के कई व्यवसायियों ने अपनी सुविधा के लिए सेड़वा व धोरीमन्ना क्षेत्र के कई किसानों से अच्छे किराये का लालच देकर कृषि कुंए पर धुलाई केंद्र बना दिए है। यहां पर छोटी छोटी हौदियां बनाकर उनमें कपड़े की धुलाई की जाती है और इससे निकलने वाला पानी यहीं पर निस्तारित होता है। यह इतना घातक केमिकल है कि जमीन के अंदर जाने के बाद पानी खारा कर देता है और जमीन को बंजर बना देता है। कुछ साल बाद इस जमीन पर घास भी नहीं उगती है।

सात से अधिक गांवाें में खेतों में बने अवैध धुलाई केंद्र,6 रुपए प्रति गांठ मिलते हैं कुआं मालिक को

सेड़वा क्षेत्र के बुरहान का तला, तालसर, पूंजासर, केकड़, मोतीबेरी, बीसासर सहित आसपास के कई गांव व धोरीमन्ना पंचायत समिति के मेहलू गांव में अवैध धुलाई केंद्र संचालित हो रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान कई व्यापारियों का कारोबार ठप हो गया था और अनुमति नहीं मिलने वाले व्यापारियों ने सीमावर्ती गांवों में काम शुरू किया। दूर दराज धोरों के बीच गांव होने की वजह से कार्रवाई का भी डर नहीं था।

इस वजह से उन्हें यह गांव सबसे सुरक्षित लगे, लेकिन यहां के किसानों को इसके दूरगामी परिणाम कितने घातक होंगे, इसका अंदाजा नहीं है। करीब 12 से अधिक अवैध धुलाई केंद्रों पर व्यापारी किसानों को प्रति गांठ धुलाई पर 6 रुपए देते हैं। इसके अलावा इसी धुलाई केंद्र पर काम करने पर मजदूरी अलग से दी जाती है। ऐसे में रोजाना एक इकाई से 125-150 गांठों की धुलाई होती है। इससे प्रत्येक इकाई पर 800 से 1000 रुपए कुआं मालिक को मिलते हैं।

इसके अलावा यदि वह उसी इकाई पर मजदूरी करता है तो तय मजदूरी भी मिलती है। रोजाना 1200 से 1500 रुपए की कमाई हो जाती है। इसकी एवज में वह अपनी जमीन का कितना नुकसान कर रहा है, इसका अंदाजा ही नहीं है। कृषि कुंए के पास ही गड्‌ढा खोदकर उसमें केमिकल युक्त पानी डाला जा रहा है। इससे कुछ समय बाद पानी से कुंए क पानी दूषित हो जाएगा और भूजल खारा हो जाएगा। इसके बाद वह पानी न पीने के काम आएगा और न ही कृषि के लिए।

एक्सपर्ट व्यू; केमिकल से जमीन की उपजाऊ परत खराब हो जाएगी

^कपड़ा धुलाई से कास्टिक व अन्य केमिकल निकलते हैं। जो कृषि भूमि के लिए बहुत ही खतरनाक होते हैं। जमीन की ऊपरी 10 से 15 सेमी. की परत फसल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। यहां पर केमिकल युक्त पानी से टॉक्सीसिडी बढ़ जाती है। इस वजह से जमीन धीरे धीरे बंजर होनी शुरू हो जाती है। कास्टिक व रंग सबसे घातक असर करते है। इसी के साथ इस परत में कई सूक्ष्म जीवाणु होते है जो पौधों के मित्र होते है, इनका पौधों की वृद्धि और पौष्टिकता में महत्वपूर्ण योगदान होते हैं। यह जीवाणु केमिकल के कारण मर जाते है। ज्यादा समय तक जमीन में केमिकल युक्त का निस्तारण होने पर कुओं में पानी खारा और केमिकल युक्त हो जाता है, जो न पीने के लायक होता है और न ही सिंचाई के लायक। इसके दूरगामी परिणाम बहुत ही घातक और खतरनाक होंगे।
-डॉ. प्रदीप पगारिया, कृषि विशेषज्ञ

अवैध इकाइयों पर कार्रवाई की जाएगी

^पूंजासर एवं बुरहान का तला में चल रही अवैध इकाइयों की पहले मुझे जानकारी मिली थी। उस दौरान उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई थी और अब पंचायती राज चुनावों के दौरान व्यस्तता अधिक होने की वजह से समय कम मिला था। अभी मैं जयपुर ट्रेनिंग में हूं। वापस आने पर ऐसी अवैध फैक्ट्रियों को चिन्हित करके बड़े स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।
-सुनील कुमार चौहान, उपखंड अधिकारी, सेड़वा।



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सेड़वा. कृषि कुंए पर धुलाई के बाद तैयार कपड़े की गांठे ट्रक में लदान करते हुए मजदूर व फैक्ट्री संचालक।


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