जिले के पंचायतीराज चुनाव ने प्रदेश में सत्तासीन कांग्रेस को करारा झटका दिया है। सत्ता में होते हुए भी उसकी पिछली बार से भी बुरी गत हुई। भाजपा की जिला परिषद में हेट्रिक बनने जा रही है। जहां उसने 25 में से 21 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। गत बार उसके 16 सदस्य थे। इस तरह उसे 5 सीटों का फायदा हुआ। वह जिले की 11 में से फिर 9 पंचायत समितियों में भी बहुमत बनाने में कामयाब रही। कांग्रेस का बहुमत केवल दो पंस क्रमश: कपासन व गंगरार में ही आया। वो भी मात्र एक-एक सीट के मार्जिन से। भाजपा ने पंचायत समितियों में कुल मिलाकर कांग्रेस के मुकाबले 68 सीटें अधिक जीती।
भदेसर व बेगूं पंस में तो कांग्रेस मात्र एक-एक सीट पर सिमट रह गई। शहीद मेजर नटवरसिंह राउमावि में पहले पंचायत समिति, उसके बाद जिप सदस्यों की मतगणना हुई। दोनों के शुरुआती रुझान में ही भाजपा का परचम नजर आने लगा। जिला परिषद में भाजपा लगातार तीसरी बार अपना बोर्ड बनाएगी। इस बार की जीत सबसे बड़ी है। कांग्रेस के कुल 4 में से 3 जिप वार्ड कपासन विस से आए, जहां विधायक भाजपा का है।
कांग्रेस: जिलास्तर पर न तो नेतृत्व था और न जीत का कोई फार्मूला, परिवारवाद में उलझ रह गए बड़े नेता
कांग्रेस की हार से ज्यादा चौकाने वाली बात सत्ता में होते हुए भी शर्मनाक प्रदर्शन होना रहा। मंत्री आंजना की पंस में वो 3 सीटों से आगे नहीं बढ़ पाई। तीनों जिप वार्ड में भी हार हुई। आंजना ने भाई मनोहरलाल को छोटीसादड़ी से लाकर पंस व जिप दोनों चुनाव लडवाए। वे जिप वार्ड तो हार बैठे। पंस में भी मुश्किल से जीते। विधायक राजेंद्र विधुडी 6 में से सिर्फ एक जिप वार्ड जिता पाए। एक वार्ड में तो उन्होंने बाहर के रिश्तेदार को उम्मीदवार बनाया था। उनकी तीन में से मात्र एक पंस गंगरार में बहुमत आया। पूर्व विधायक सुरेंद्रसिंह जाडावत और प्रकाश चौधरी के क्षेत्रों में भी न तो पंस बनी और न जिप का कोई वार्ड आया। बड़ीसादड़ी में चौधरी के पुत्र भी मुश्किल से जीते। पूरे चुनाव में कांग्रेस का एक भी नेता या पदाधिकारी ऐसा नहीं था, जो पूरे जिले में घूमा हो।
भाजपा: संगठनात्मक व्यूहरचना, जिला से लेकर प्रदेशस्तर तक से पूरी निगरानी, आक्रामक रणनीति रखी
भाजपा ने चुनाव को पूरी व्यूह रचना खासकर संगठनात्मक ढांचे का उपयोग करते हुए लड़ा। उसका शुरू से पूरा फोकस जिला परिषद बोर्ड बनाने पर रहा। जिला प्रमुख पद अनारक्षित होते हुए भी उसने ओबीसी से आने वाले अपने दो पूर्व विधायकों को भी मैदान में उतार दिया। सामान्य वर्ग से भी नवोदित या ताकतवर चेहरे उतारे। जिला चुनाव प्रभारी दामोदर अग्रवाल अधिकांश समय पडाव डाले रहे। जिलाध्यक्ष गौतम दक सहित संगठन ने माइक्रो लेवल पर काम किया। विपक्ष में होते हुए भी विधायक चंद्रभानसिंह आक्या अपनी दोनों पंस व जिप के सभी वार्डों पर कब्जा करने में सफल रहे। ऐसा ही जिलाध्यक्ष दक व विधायक ललित ओस्तवाल के इलाके में हुआ। हालांकि भाजपा में भी कई नेताओं के रिश्तेदार मैदान में आए पर उसका फार्मुला जिताऊ का ही रहा।
भाजपा में जिला प्रमुख पद के लिए इनमें जोर अजमाइश
- सुरेश धाकड़: प्रभावशाली किसान जाति से, युवा व पूर्व विधायक होने के साथ सबसे अधिक वोट से जीत का रिकाॅर्ड। कुछ प्रमुख नेताओं से भी समर्थन की उम्मीद।
- माइनस प्वाइंट- प्रमुख पद 20 साल बाद अनारक्षित हुआ। वे ओबीसी से है।
- बद्री जाट: युवा पूर्व विधायक व वर्तमान में डेयरी चेयरमैन। किसान वर्ग से आने के साथ प्रभावशाली जाट समाज के नेता भी है। पहले भी जिप सदस्य रह चुके।
- माइनस प्वाइंट- प्रमुख पद अनारक्षित है और वे ओबीसी से आते। डेयरी का पद होने से भी संतुष्ट करने का प्रयास।
- भूपेंद्रसिंह सोलंकी: युवा चेहरा होते हुए भी कांग्रेस के नेता मंत्री उदयलाल आंजना के भाई को हराकर आए। सामान्य वर्ग खासकर राजपूत समाज से होने के साथ पार्टी में पारिवारिक पृष्ठभूमि से भी दावा। पूर्व मंत्री श्रीचंद कृपलानी के क्षेत्र से।
- माइनस प्वांइट- नया चेहरा होने के साथ दो पूर्व विधायकों की दावेदारी का दबाव। संगठन व अन्य बड़े नेताओं का समर्थन पाना चुनौती।
सबसे बड़ी जीत 10997 वोट से जिप वार्ड 22में भाजपा के सुरेश धाकड़ की
सबसे छोटी हार 41 वोट से जिप वार्ड 25 में कांग्रेस की कृष्णा जाट की
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