अजमेर डेयरी बनी उत्तर भारत की सबसे बड़ी डेयरी, रिकाॅर्ड 100 टन सफेद मक्खन का ऑर्डर भी मिला

अजमेर डेयरी शुक्रवार काे इतिहास रचने जा रही है। उत्तर भारत का यह पहला डेयरी प्लांट बन गया है, जिसमें इतने अत्याधुनिक संसाधन लगे हाेने के साथ ही इतने विशाल स्तर पर डेयरी उत्पाद बन रहे हैं। 313.11 कराेड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ दुग्ध प्रोसेसिंग प्लांट का शुक्रवार काे मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत वीडियाे काॅन्फ्रेंसिंग से उद‌्घाटन करेंगे। अब अजमेर डेयरी प्लांट जहां उत्तर भारत का सबसे बड़ा प्लांट बन गया है, वहीं डेयरी काे रिकाॅर्ड 100 टन सफेद मक्खन का ऑर्डर भी मिला है।


डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चाैधरी ने बताया कि तीस साल पहले देखा गया सपना अब साकार हुआ है। 1990 में यहां आने के बाद उन्हाेंने यह सपना देखा था कि इस डेयरी काे वे देश की सर्वाेच्च डेयरी के पायदान पर ले जाएंगे। यह सपना आज सभी के प्रयासाें से सफल हाे गया है। चाैधरी ने बताया कि डेयरी के नवीन संचालित दुग्ध प्रोसेसिंग प्लांट का उद्‌घाटन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुक्रवार काे करेंगे। मुख्यमंत्री के साथ चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा, कृषि पशुपालन मंत्री लाल चन्द कटारिया, खनिज एवं गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया, सहकारिता मंत्री उदय लाल आंजना, शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा भी जयपुर में माैजूद रहेंगे। वहीं, अजमेर के कलेक्ट्रेट स्थित भारत निर्माण सेवा केन्द्र पर सांसद भागीरथ चौधरी, विधायक अनिता भदेल उपस्थित रहेंगी।

प्लांट में 42 प्रकार के दुग्ध उत्पाद तैयार होंगे, प्रतिदिन 8 लाख लीटर दूध उत्पादन की क्षमता

एमडी उमेश चन्द्र व्यास ने बताया कि प्लांट की प्रतिदिन की क्षमता 8 लाख लीटर दूध उत्पादन की है। प्लांट पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी पर है। यहां 42 प्रकार के दुग्ध उत्पाद तैयार हाेंगे। सफेद मक्खन बाजार से कम दर पर दिया जाएगा। यह प्लांट उत्तरी भारत का सबसे बडा प्लांट है। उन्होंने बताया कि अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ राजस्थान सहकारी अधिनियम 1965 के तहत वर्ष 1972 में पंजीकृत हो गया था। डेयरी के शुरुआती चरण में 25 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के दुग्ध संयंत्र को 1.5 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता तक पहुंचाया गया, जो अब 8 लाख लीटर तक पहुंच गया है।

  • जिले में 727 दूध उत्पादक सहकारी समितियां पंजीकृत हैं। लगभग 350 लाख लीटर दूध संकलन किया जा रहा है। नया संयंत्र 8 से 10 लाख लीटर क्षमता प्रतिदिन व 30 मेट्रिक टन दूध पाउडर उत्पादन का है।
  • सिविल निर्माण कार्य पर 7248.98 लाख, प्रसंस्करण उपकरण पर 10631.59 लाख, सर्विस उपकरण पर 4325.33 लाख, अन्य उपकरण पर 319.48 लाख, स्थापना कार्य पर 1214.47 लाख, अन्य व्यय निविदा इत्यादि पर 25 लाख, तकनीकी सेवाओं शुल्क पर 1305.70 लाख तथा टैक्स व जीएसटी पर 195.85 लाख सहित परियोजना की लागत पर कुल 25266.40 लाख रुपए आंकलन किया गया।
  • स्वचलित संयंत्र की लगभग क्षमता 8 लाख लीटर प्रतिदिन है जिसे 10 लाख लीटर प्रतिदिन तक किया जाएगा। इसमें 4 लाख लीटर प्रतिदिन दूध पैकिंग फेसिलिटी है। वहीं फलेवर्ड मिल्क पेट बोटल्स में 5 हजार लीटर प्रतिदिन, छाछ पैकेट में 50 हजार लीटर प्रतिदिन, लस्सी पैकेट में 5 हजार लीटर प्रतिदिन, पनीर 2 मैट्रिक टन प्रतिदिन, दही 5 मैट्रिक टन प्रतिदिन, श्रीखण्ड 2 मैट्रिक टन प्रतिदिन, आइसक्रीम 10 मैट्रिक टन प्रतिदिन, दूध पाउडर (एसएमपी) 30 मैट्रिक टन प्रतिदिन, टेबल बटर 5 मैट्रिक टन प्रतिदिन, घी 30 मैट्रिक टन प्रतिदिन, ईटीपी संयंत्र 15 लाख लीटर प्रतिदिन उत्पाद क्षमताएं वर्तमान संयंत्र की क्षमता है।


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