राज्य व केन्द्र सरकार भी अलग- अलग मद्दों व योजनाओं के तहत हर गांव में करोड़ों रुपये खर्च कर गांवों में विकास के कार्य करवाने के दावों के बावजूद गांवों में गंदे पानी की निकासी का प्रबंध भी नहीं हो पा रहा है।
अधिकतर गांवों में पिछले लम्बे समय से हालात खराब हैं। ग्रामीण गंदे पानी के बीच दुर्गन्ध व बीमारियों में जीवन यापन कर रहे हैं। इसको लेकर भास्कर की टीम ने अलग अलग गांवों में जाकर हालात देखे जो स्वच्छता के अभियान की पोल खुल गई। उपखण्ड के हुडास, रताऊ, खोखरी सहित कई ऐसे गांव हैं जहां आम रास्ते गंदगी से सराबोर है। बार- बार अवगत करवाने के बाद भी इस ओर पंचायत प्रशासन कोई ध्यान नहीं देते हैं। यहां हुडास गांव के ग्रामीण पिछले लम्बे समय गंदगी की बीच जीवन यापन कर रहे हैं।
गांव में घुसते ही मुख्य मार्ग पर गंदगी इस कदर फैली हुई है कि पैदल राहगीरों के रास्तों से गुजरना किसी मुसीबत से कम नहीं है। गंदे पानी की निकासी के अभाव में गुवाड़ के पास गंदे पानी ने तालाब का रुप ले लिया है। लम्बे समय से एक स्थान पर जमा गंदे पानी से दुर्गन्ध फैलने के साथ मच्छर पैदा हो गये हैं। जो बीमारियाें को नियंत्रण दे रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना कि गंदे पानी को लेकर यहां बोरिंग के अलावा चार- पांच स्थानों पर सुखता गड्ढा भी बनाया गया, लेकिन कोई बात नहीं बन पाई। ऐसे में सरकार की तरफ से खर्च राशि का कोई उपयोग नहीं हो पाया और पानी निकासी के लिए किये गये प्रयास मात्र औपचारिकता साबित हुए। ऐसे ही हालात गैनाणा ग्राम पंचायत के खोखरी व रताऊ गांव के हैं जहां पर आम रास्तों में गंदा पानी पुरी सड़क पर बहता रहता है। गांव के मुख्य मार्गो में यह गंदा पानी राहगीरों व ग्रामीणों के लिए नासूर बन चुका है।
खोखरी गांव की सरकारी स्कूल, श्री तेजाजी मन्दिर सहित अन्य मार्गो से जुड़ने वाले आम रास्ते में कीचड़ फैला हुआ है। ऐसे ही हालात रताऊ ग्राम पंचायत के हैं जहां गांव का अधिकतर गंदा पानी मुख्य मार्ग से बहता नेशनल हाईवे संख्या 458 तक पहुंच जाता है। लेकिन गांवों में गंदे पानी की निकासी के लिए कोई प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के चुनावों में जनप्रतिनिधि गांव के विकास के दावे जरुर किये मगर हालात यह है कि पंचायत अपने क्षेत्र में गंदे पानी की निकासी के प्रबन्ध तक नहीं पा रही है।
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