बाडी नदी में चली डिविडिंग, अंतिम छाेर तक निकाली जाएगी जलकुंभी,अभी विश्राम स्थली पुलिया के निकट से जलकुंभी निकाली जा रही है

आनासागर झील से आखिर बाडी नदी में उतारी गई डिविडिंग मशीन ने गुरुवार सुबह से ही काम करना शुरू कर दिया। दिन भर डिविडिंग मशीन बाडी नदी में जलकुंभी निकालती रही। अभी विश्राम स्थली पुलिया के निकट से जलकुंभी निकाली जा रही है। पानी का फ्लाे पीछे हाेने के कारण आनासागर की ओर जा रही जलकुंभी फिर से पीछे आ जाएगी।

इस कारण पहले यहां से सारी जलकुंभी बाहर निकाली जाएगी ताकि यहां से जलकुंभी पुलिया के नीचे से हाेकर आनासागर झील में नहीं जा सके। नगर निगम के उपायुक्त गजेंद्र सिंह रलावता ने बताया कि हर तीन से चार माह बाद जलकुंभी यहीं बाडी नदी के छाेर पर आकर अटक जाती है। इस कारण इस बार इसका स्थायी विकल्प तलाशा गया है।

जहां तक डिविडिंग मशीन बाडी नदी में चल सकेगी वहां तक पूरी तरह से जलकुंभी व कचरे काे निकाल दिया जाएगा। आनासागर झील की तरह इसे भी पूरी तरह साफ करेंगे। निगम उपायुक्त रलावता ने गुरुवार काे अधिकारियों के साथ पैदल ही बाडी नदी के आसपास के क्षेत्रों का दाैरा किया। इस दौरान आगे रामनगर की ओर पुलिया के निकट पानी की पाइप लाइन निकल रही है।

वहां से मशीन काे आगे ले जाने में परेशानी हाेगी, हालांकि आगे की ओर जलकुंभी इतनी नहीं है। फिर भी निगम की टीम इस बार पूरी जलकुंभी निकालने का प्रयास करेगी। इसी कारण नगर निगम की सफाई गैंगसा यानी सफाई कर्मचारियों की टीम का इसमें सहयोग लिया जाएगा।एसटीपी से किया जाएगा कनेक्शन | उपायुक्त रलावता ने बताया कि यहां निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि यहां का पानी स्थिर

रहता है। इसी कारण पानी में जलकुंभी आसानी से पनप जाती है। इसी काे देखते हुए इस बार निगम ने यहां से जलकुंभी साफ हाेने के बाद इसका कनेक्शन सीधे सीवरेज प्लांट में करने का निश्चय किया है ताकि पानी लगातार चलता रहने के साथ ही वहां फिल्टर भी हाे जाएगा। नया पानी लगातार आने के कारण फिर यहां जलकुंभी नहीं पनप सकेगी।



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बाडी नदी में फैली जलकुंभी को निकालती नगर निगम की मशीन।


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