मेट्रो के यात्री भार में दिनोंदिन बढ़ोतरी हो रही है। यात्री भार अब 7 हजार पहुंच गया है, जबकि इससे पहले शुरूआती 3 हजार प्रतिदिन यात्री भार था। नवम्बर के शुरूआती सप्ताह में यह बढ़कर 5 हजार हो गई। इतना ही नहीं दीपावली सीजन की वजह से 6 नवम्बर को 11 हजार तो 7 नवम्बर को 20 हजार यात्री पहुंच गए थे।
8 नवम्बर को यात्री भार 17 हजार था। वहीं दिल्ली मेट्रो का यात्री भार 9 लाख 42 हजार से बढ़कर 16 लाख 25 हजार पहुंच गया है, लेकिन दिल्ली मेट्रो 359 किमी प्रतिदिन संचालित होती है, जबकि जयपुर मेट्रो सिर्फ 12 किमी ही है।
नागपुर मेट्रो में हर दिन मात्र 5 हजार तो कोलकत्ता मेट्रो में 11 हजार, मुंबई मोनो रेल में 1 हजार यात्री, चेन्नई मेट्रो में हर दिन 28 हजार यात्री सफर कर रहे है। यह स्थिति तो तब है, जबकि नागपुर मेट्रो का सफर 25 किमी तो कोलकत्ता मेट्रो का 27 किमी, मुंबई मोनो रेल 19 और चेन्नई मेट्रो 45 पर चल रही है।
पांचवीं बार बन चुकी है डीपीआर
मेट्रो के सेकेंड फेज का शहरवासी 10 साल से इंतजार कर रहे हैं। 10 साल में 23 किमी पर चलने वाली सेकेंड फेज मेट्रो की कांग्रेस और बीजेपी सरकार में अब तक चार बार डीपीआर बन चुकी है। अब सीतापुरा से अंबाबाड़ी के बीच चलने वाली मेट्रो के सेकेंड फेज की पांचवी बार डीपीआर बन चुकी है।
लागत भी 10 हजार करोड़ से घटकर 4 हजार 500 करोड़ हो गई। यह डीपीआर दो महीने पहले दिल्ली मेट्रो ने सौंपी। डीपीआर तैयार और लागत कम होने के बाद भी सरकार ने अभी तक इस पर निर्णय नहीं लिया है। अगर मेट्रो का सेकेंड फेज बन जाता है तो जयपुर मेट्रो की राइडर-शिप एकदम से कई गुना बढ़ जाएगी। घाटे में चलने वाली मेट्रो लाभ में आ जाएगी।
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