मांडकलां में कार्तिक पूर्णिमा पर हर साल लगने वाला 15 दिवसीय पशु व व्यापारिक मेला कोरोना के चलते इस बार नहीं लगेगा। लघु पुष्कर के नाम से प्रसिद्ध मांडकलां सरोवर में कार्तिक पूर्णिमा पर हर वर्ष नागरचाल क्षेत्र के हजारों लोगों डुबकी लगाने आते थे। साथ ही मेले में पशु, कपड़े, घरेलु एवं काश्तकारी सामान का काफी कारोबार होता था।
इसके लिए 300 से अधिक दुकानें लगाई जाती थीं। इसके अलावा मनोरंज के साधनों के आने के साथ ही विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होता था। ऐसे में पंचायत को राजस्व का नुकसान होने के साथ लाखों रुपए का कारोबार भी प्रभावित होगा। यहां 36 कौमों के मंदिरों, धर्मशालाएं बनी हुई हैं।
प्राचीन मालव गणराज्य की राजधानी एवं मांडव ऋषि की तपोभूमि पर हर वर्ष 15 दिवसीय पशु एवं व्यापारिक मेला कार्तिक पूर्णिमा से लगता था। कोरोना महामारी को देखते हुए इस वर्ष स्थानीय प्रशासन ने मेला लगाने से इनकार कर दिया है।
कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों श्रद्धालु लघु पुष्कर मांडकला सरोवर में स्नान करने आते हैं, लेकिन सरोवर में पानी कम होने के कारण श्रद्धालुओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। लघु पुष्कर मांडकला सरोवर के तट पर बने सभी समाजों के मंदिरों की समितियां व स्थानीय प्रशासन कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं के लिए स्नान करने की व्यवस्था करेंगे।
पहली बार सरोवर पर रहेगा सन्नाटा
पौराणिक रूप से कार्तिक मास की प्रबोधिनी एकादशी तिथि बुधवार से पुष्कर का धार्मिक मेला शुरू हो जाता है, जो पूर्णिमा स्थिति को हजारों की संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। कोरोना के चलते यह पहला अवसर रहेगा लघु पुष्कर मांडकला की उत्पत्ति से लेकर हजारों साल में इस बार मेला स्थल व सरोवर के घाट पर सन्नाटा पसरा देखा जाएगा।
इनका कहना है
कार्तिक पूर्णिमा को लघु पुष्कर मांडकला सरोवर में होने वाले महास्नान पर श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करने के लिए श्रद्धालुओं को प्रेरित किया जाएगा।
-त्रिलोक शर्मा, ग्राम विकास अधिकारी, नगरफोर्ट।
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