आंबापुरा के हालादेव बावजी में लगने वाला मेला नहीं भरा, लेकिन इस क्षेत्र के आसपास के जनजाति लोगों की आस्था का केंद्र होने पर रविवार को दिनभर दर्शनों के लिए लोग आते जाते नजर आए। यहां के पूर्व सरपंच सत्यनारायण मीणा ने बताया कि यह मंदिर सौ सालों से भी पुराना है।
क्षेत्र के अधिकांश लोग किसान है, वे बारिश के दिनों अच्छी बारिश व खूब पैदावार की मन्नत लेते है व दीपावली के दूसरे दिन मंदिर में जाकर नारियल फोड़ व हवन कर ली गई मन्नत छोड़ते हैं। नही लगा लेकिन मंदिर में दर्शनार्थी जरूर आये व ली गई मन्नते छोड़ी। क्षेत्र का एक प्रसिद्ध नृत्य है वोरा वोरी, यह आदिवासी समाज में दीपावली के दूसरे दिन कुछ पुरुष महिलाओं के वस्त्र पहनकर तो कुछ पुरुष ढोल की थाप पर हाथ में नंगी तलवार लिए नृत्य करते हैं।
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