(मनीष शर्मा)। गिरिराज तलहटी में घर-घर गोवर्धन पूजा के साथ अन्नकूट महोत्सव मनाया गया। बृज का प्रमुख त्यौहार गिरिराज पूजा देशभर में खास अंदाज में मनाया जाता है। हर कोई दिवाली के दूसरे दिन मनाए जाने वाले इस खास पर्व को गिरिराज जी पूजा करके मनाता है।
गिरिराज धाम में रविवार सुबह से ही गोवर्धन तलहटी में श्रद्धालु गिरिराज मंदिरों पर जुटना शुरू हो गए। गोवर्धन के प्रमुख मंदिरों गिरिराज जी दानघाटी मंदिर, मानसी गंगा मुकुट मुखारविंद मंदिर, जतीपुरा मुखारविंद मंदिर आदि प्रमुख स्थानों पर श्रद्धालुओं ने दुग्धाभिषेक कर गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना की।
गोवर्धन सात कोसी परिक्रमा में भी भक्तों की खासी भीड़ रही। हालांकि हर वर्ष की भांति गिरिराज पूजा के लिए पैदल चलकर जाने वाले गौड़ीय संप्रदाय के देसी-विदेशी गिरिराज भक्तों का काफिला इस बार कोरोना महामारी के चलते नदारद रहा।
दानघाटी मंदिर में मनाया छप्पन भोग महोत्सव
वहीं जतीपुरा के मुखारविंद मंदिर में अन्नकूट महोत्सव का मुख्य प्रसाद बाजरा, चावल, कढी, पकौड़ी, खीर, पापड़ आदि गिरिराज जी को भोग लगाकर प्रसाद भक्तों को वितरित हुआ तो भक्तों ने दानघाटी मंदिर में छप्पन भोग महोत्सव का आयोजन किया।
मुकुट मुखारविंद मंदिर पर भी छप्पन भोग मनोरथ का आयोजन रिसीवर रमाकांत गोस्वामी के द्वारा भव्यता के साथ आयोजित किया गया। सुबह से शाम तक तलहटी में गिरिराज पूजा के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती रही। इसके बाद शाम को घर-घर में गाय के गोबर के गोवर्धन बनाकर विधि-विधान से पूजे गए। पूरा 21 किलोमीटर गोवर्धन गिरिराज परिक्रमा मार्ग गिरिराज जी के जयकारों से गूंजता रहा।
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