कोरोना इलाज के नाम पर लूट का आराेप, पार्षद पहुंचे कलेक्टर काेठी, बाहर नहीं आए तो गुस्से में की नारेबाजी
काेविड-19 के नाम पर मरीजाें से लूट हाेने का आराेप लगाते हुए अनेक पार्षद इसकी शिकायत करने के लिए साेमवार काे कलेक्टर महावीर प्रसाद वर्मा के सरकारी आवास पर पहुंचे। कलेक्टर की काेठी पर जाने के बाद पार्षदाें ने कलेक्टर काे इस बाबत संदेश भिजवाया। हर बार अंदर से एक ही जवाब मिलता कि कुछ समय में कलेक्टर साहब आ रहे हैं। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। करीब एक घंटे इंतजार के बाद भी कलेक्टर बाहर नहीं आए ताे पार्षदाें ने हंगामा शुरू कर दिया।
पार्षदाें के हंगामे की सूचना मिलते ही काेतवाली थाना प्रभारी जाब्ते सहित माैके पर आए। समझाइश का प्रयास किया, लेकिन पार्षद नहीं माने। पार्षदाें ने प्रशासन काे चेतावनी दी कि 18 नवंबर तक यदि निजी अस्पतालाें पर कार्रवाई नहीं हुई ताे 19 काे कलेक्ट्रेट के आगे धरना प्रदर्शन किया जाएगा। पार्षदाें ने बताया कि गंगानगर के मरीजाें काे पंजाब, दिल्ली तक भेजा जा रहा है।
काेराेना काल में पहले ही हजाराें लाेग बेराेजगार हाे चुके हैं, उद्याेग धंधे बंद हाे चुके हैं। ऐसे में जिला प्रशासन काे परेशान लाेगाें की मदद करनी चाहिए। पार्षद संजय बिश्नाेई ने इस संबंध में साेशल मीडिया पर भी वीडियाे शेयर की है। साथ ही निजी अस्पतालाें पर कार्रवाई की मांग की गई है।
एक निजी अस्पताल 6 दिन का 1 लाख 30 हजार रुपए का बिल मरीजों से वसूल कर रहा है
उप सभापति लाेकेश मनचंदा, पार्षद कमल नारंग, प्रियंक भाटी, रामगाेपाल यादव, अशाेक मुंजराल, विशु मिढ्डा अादि का कहना था कि काेविड-19 के प्रचार-प्रसार के नाम पर सरकार कराेड़ाें रुपए खर्च कर रही है। लाेगाें काे मास्क भी निशुल्क बांटे जा रहे हैं। लेकिन निजी अस्पतालाें ने इसे बड़ी कमाई का जरिया बना रखा है। गरीब लाेगाें काे लूटा जा रहा है। सरकार कह रही है कि काेविड-19 की फिलहाल काेई दवा नहीं है, ऐसे में निजी अस्पताल किस बात के लाखाें रुपए वसूल रहे हैं?...।
कमल नारंग, अजय दावड़ा ने कहा कि मरीजाें से लाखाें रुपए इलाज के नाम पर निजी अस्पताल वसूली कर रहे हैं। इस बाबत कई बार प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग तक भी समय-समय पर शिकायतें पहुंचीं। लेकिन किसी ने भी निजी अस्पतालाें की मनमानी राेकने व काेराेना महामारी के समय परेशानी भुगत रहे गरीब लाेगाें की परेशानी दूर करने का प्रयास नहीं किया।
सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं, निजी में भेज रहे, पंजाब और दिल्ली तक जा रहे हैं मरीज
पार्षद संजय बिश्नाेई, किशन चाैहान, विजेंद्र स्वामी, सुशील चाैधरी, प्रहलाद साेनी, पू्र्व उप सभापति अजय दावडा, पवन गाैड़, महेंद्र बागड़ी सहित अन्य का कहना था कि मरीजाें काे कहीं भी राहत नहीं मिल रही। सरकारी अस्पताल जाते हैं ताे वहां इलाज नहीं मिलता। ऑक्सीजन की कमी बताकर शहर के ही एक निजी अस्पताल में काेविड-19 का उपचार हाेने की बात कहकर भिजवा दिया जाता है।
हैरानी की बात यह है कि सरकार निजी अस्पतालाें काे 4 हजार रुपए प्रतिदिन से अधिक चार्ज नहीं लेने के निर्देश दे रही है, ऐसे में 6 दिन के 1 लाख 30 हजार रुपए का बिल मरीजाें काे थमाया जा रहा है। विभाग काे भी इसकी जानकारी है, लेकिन कार्रवाई करने से सभी बचने में लगे हुए हैं।
अनावश्यक दबाव के लिए किया जा रहा है प्रदर्शन
दूसरी तरफ कोविड अस्पताल संचालक जन सेवा अस्पताल के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की ओर से जिला कलेक्टर को ज्ञापन भेजा गया है कि उन्हें पिछले कुछ दिनों से काेविड अस्पताल के संचालन में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कुछ राजनीतिक व्यक्तियों की ओर से आए दिन रोगियों के निशुल्क इलाज, जांच, भोजन व अन्य सुविधाएं देने के लिए धमकाया जा रहा है। ऐसा नहीं करने पर विरोध प्रदर्शन व धरना लगाने की धमकी दी जाती है।
ज्ञापन के अनुसार संस्थान शहर के गणमान्य व्यक्तियों के कहने पर यथासंभव छूट देता है। फिर भी कुछ लोग द्वेषतापूर्वक नकारात्मक प्रचार-प्रसार करते हैं। ज्ञापन के अनुसार जन सेवा अस्पताल ने कोरोना काल में प्रशासन के कहने पर क्वारेंटाइन व आइसोलेशन सेंटर बनाने की पहल की। इसके बदले संस्था को एक रुपए सरकारी अनुदान भी प्राप्त नहीं हुआ। कोविड केयर सेंटर की अनुदान राशि भी उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। ज्ञापन में जिला कलेक्टर से अस्पताल को राजनीतिक दबाव से निजात दिलाने की मांग की है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
टिप्पणियाँ