कार्तिक मास की पूर्णिमा पवित्र नदियों में स्नान अधिक महत्व होता है, लेकिन इस बार कोरोना के चलते कार्तिक नहाने वाली महिलाएं घरों में गंगा जल का मिलाकर परंपरा का निर्वहन करेंगे। कार्तिक मास की अमावस्या यानी दीपावली का जितना महत्व है उतना ही महत्व कार्तिक मास की पूर्णिमा का माना जाता है। इस बार कार्तिक मास शुक्लपक्ष की पूर्णिमा सोमवार को मनाई जाएगी।
कार्तिक मास का सबसे आखिरी दिन होता है। जब पूर्णिमा, स्नान और दान के लिहाज से यह दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस बार काेराेेना के चलते डाक विभाग ने 60 गंगा जल की बिकी हो पाई है, काेरोना के चलते गंगाजल की सप्लाई नहीं आई है। मार्केटिंग एक्जुकेटिव जावेद खान ने बताया कि पिछले दो सालों में कार्तिक के महीने में लगभग 500 से अधिक गंगा जल कि बोतलें बिक जाती थी, लेकिन इस बार कार्तिक के महीने में महज 60 बोतलें ही बिक पाई, काेरोना के चलते गंगा जल की सप्लाई नहीं आई।
पं अश्वनी मिश्रा ने बताया कि संयोग से इस दिन 9 रेखा सावा, रोहिणी नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि व वर्धमान योग का संयोग होने से कार्तिक पूर्णिमा पर ये शुभ संयोग और भी पावन बना रहेगा। इस दिन दान और गंगा नदी में या तीर्थ पर स्नान करने से पूरे वर्ष का स्नान करने का फल मिलता है, लेकिन इस बार कोरोना के कारण संभव नहीं है आप घर पर ही जल में गंगा जल मिलाकर स्नान कर सकते है।
इस दिन जब चंद्रमा आकाश में उदित होता है। उस समय चंद्रमा की 6 कृतिकाओं का पूजन करने से शिवजी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। पूर्णिमा पर इस साल का चौथा और आखिरी उप्छाया चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, परन्तु इस ग्रहण सभी शुभ कार्य होंगे।
स्टेश्न रोड के पास रहने वाली ऊषा साबु ने कहा कि हर साल कार्तिक का स्नान करते है, लेकिन इस बार कोरोना के चलते घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करेंगे, जिससे परंपरा बनी रहे। ज़रुरतमंद बच्चों को स्टेशनरी एवं गायों के लिए चारे कि व्यवस्था करेंगे।
माया बियानी ने कहा कि कार्तिक महीन में मंदिरों में जाने पर पाबंदी होने के कारण घर में ही लडडू गोपाल की पुजा अर्चना करते है। काेरोना के चलते कथा भी परिवार के लोग ही शामिल हो पाते है। कोरोना के चलते सिर्फ परंपरा का निर्वहन कर रहे।
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