कस्बे के मुख्य बाजार में कल्याणराय जी मन्दिर के सामने पुराना उपतहसील (अस्पताल) भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर खंडहर में तब्दील हो गया है। अस्पताल के बाद में इस बिल्डिंग में उपतहसील संचालित होने पर तो सब कुछ सही था, लेकिन 4 साल पहले उपतहसील के भी नए भवन में शिफ्ट हो जाने के बाद इसकी किसी एजेंसी ने सुध लेना ही मुनासिब नहीं समझा।
परिसर में चारों तरफ गंदगी, कचरे की भरमार है। वहीं, पेयजल के लिए लगा ट्यूबवैल 5 साल से खराब है। हैंडपंप भी नकारा पड़ा है। ऐसे में एक दशक पहले 50 हजार की लागत से निर्मित पेयजल टंकी अनुपयोगी पड़ी हुई है। भवन में कमरे व दीवारें क्षतिग्रस्त हैं, उनमें जगह-जगह दरारें पड़ी हैं। किवाड़ जंगले क्षतिग्रस्त हो गए हैं, चारदीवारी ढह गई है। भवन की छत उपयोग में नहीं लेने व लम्बे समय से साफ सफाई के अभाव में घास-फूस उगी हुई है। पंचायत के आधिपत्यवाले इस क्षतिग्रस्त भवन की मरम्मत के लिए पंचायत बजट व निजी आय की कमी की बात कहकर टालती रही है। एक दशक पहले यहां संचालित अस्पताल के इंद्रगढ़ रोड नए भवन में शिफ्ट होने के बाद से ही यह बिल्डिंग क्षतिग्रस्त व वीरान पड़ी थी। बाद में यहां स्वीकृत हुई उपतहसील को शुरू किया।
तब इस भवन का उपयोग वापस शुरू होने से ग्रामीणों की आवाजाही से चहल-पहल व साफ-सफाई नजर आई, लेकिन उपतहसील के भी 4 साल पहले अपने भवन में शिफ्ट होने के बाद से ही यह भवन वीरान पड़ा है। नजूल बनी सरकारी सम्पत्ति की सुध नहीं लेने से चारों तरफ गंदगी फैली हुई है। आवारा मवेशी घूमते रहते हैं। असामाजिक तत्व जमा रहते हैं। मोहल्लेवासी कूड़ा-करकट-गंदगी करने-मलबा फेंकने में इसका उपयोग करते हैं। परिसर चारों तरफ से गंदगी से घिरा हुआ है। परिसर के इर्द-गिर्द रहनेवाले मोहल्लेवासी, दुकानदारों परिसर में जमा गंदगी व अनैतिक कार्यकलापों व समुचित उपयोग नहीं होने से खफा है।
कब फिरेंगे खंडहर पड़े भवनों के दिन
बस स्टैंड स्थित पुरानी बालिका स्कूल, मुख्य बाजार व कस्बे के बीचों-बीच पुराने अस्पताल भवन की भूमि बेशकीमती होने से ग्रामीण समय-समय पर इसका सार्वजनिक, व्यावसायिक उपयोग करने की योजना बनाने के सुझाव देते रहे हैं। ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने सार्वजनिक धर्मशाला निर्माण कराकर आयोजनों में सुविधा उपलब्ध कराने, पंचायत की आर्थिक हैसियत बढ़ाने की भी नसीहत दी, लेकिन क़ानूनी पेचीदगियों व पंचायत के पास निजी आय की कमी से अभी तक दिए गए सुझावों फर अमल नहीं हो पाया है। सांसद व विधायक कोष या अन्य कोई योजना, बजट से नजूल भवन का कायाकल्प हो सकता है।
सरपंच-उपसरपंच यह बाेले
करवर सरपंच दीपकला नागर और उपसरपंच पंकज उर्फ अन्तिम दाधीच का कहना है कि पंचायत प्रशासन बाजार के पुराने तहसील (अस्पताल) भवन, बस स्टैंड के बालिका स्कूल भवन व पंचायत के स्वामित्ववाले दूसरे नजूल भवनों के समुचित विकास व उपयोग के लिए प्रयासरत है। प्रस्ताव ले रखे हैं। पंचायत के पास निजी आय व बजट के अभाव में इनका अपेक्षित विकास नहीं हो पा रहा है। जनप्रतिनिधियों, सांसद, विधायक के सामने भी इनके विकास की समस्या को रखा है। इनका समुचित विकास करवाया जाएगा।
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