प्रदेश में काेराेना के सर्वाधिक आतंक से जूझ रहे जाेधपुर में शुक्रवार काे 9 और संक्रमिताें ने दम ताेड़ दिया। दिनाेंदिन बड़ी संख्या में हाे रही माैताें ने अब दहशत में डाल दिया है। इस माह में अब तक 27 दिनाें में 190 संक्रमिताें की माैत हाे चुकी हैं। इससे पहले सर्वाधिक मौतें सितंबर में हुई थी, तब 30 दिन में 191 माैतें हुई थी।
इस माह से पहले प्रतिदिन चार या पांच की औसत से माैतें हाे रही थी, वाे नवंबर में बढ़कर सात हाे गया है। कुल माैताें का आंकड़ा भी 726 पहुंच गया है, जाे प्रदेश में सर्वाधिक है। वहीं शुक्रवार काे 531 नए राेगी मिले और 317 डिस्चार्ज किए गए। कुल संक्रमिताें का आंकड़ा 53,471 पहुंच चुका है। इनमें से 43,764 राेगी ठीक हाे चुके हैं।
एमडीएम, एमजीएच और एम्स में 3-3 माैतें
शहर में शुक्रवार काे एमडीएम, एमजीएच व एम्स तीनाें अस्पतालाें में तीन-तीन माैतें हुई। एमडीएम में चाैहाबाे निवासी लक्ष्मण हिरानी (60), कुड़ी भगतासनी लक्ष्मी नगर निवासी भंवरी देवी (72) व झालामंड दुर्गा नगर निवासी जब्बर सिंह, एमजीएच में बलदेव नगर चंद्राराम (65), बागर चाैक निवासी जयनारायण (70) व पवन विहार निवासी दिलीप गाेयल (62) अाैर एम्स में रातानाडा निवासी शेरसिंह (83), चाैपासनी मंदिर के पीछे गाेशाला के पास रहने वाले ब्रजमाेहन (75) व शंकरलाल (65) का निधन हुअा।
चालान से ज्यादा जान महत्वपूर्ण है, इसलिए मास्क डर से नहीं घर से ही पहनिए
शहर में कोरोना के कहर को काबू करने के लिए पुलिस-प्रशासन और निगम अब सख्ती भी कर रहे हैं। बाजारों, सड़कों पर बिना मास्क और डिस्टेंसिंग दिखते ही चालान बनाए जा रहे हैं। हालांकि अब भी मास्क नहीं पहनने वाले और पुलिस को देख मास्क चढ़ाने वालों को समझना होगा कि चालान नहीं बल्कि जान महत्वपूर्ण है। पुलिस या चालान के डर से नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक के तौर पर घर से ही मास्क पहनकर निकलिए।
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