महामारी काल में भी ऐसी लापरवाही, 8.75 लाख की नि:शुल्क दवाएं एक्सपायर हो गईं

महामारी काल में जब स्वास्थ्य सेवाओं पर अत्यधिक ध्यान देने की जरूरत है, तब भी जिम्मेदारों की लापरवाही से तकरीबन 8.75 लाख रुपए की सरकारी दवाएं एक्सपायर हो गई हैं। यह दवाएं मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत मरीजों को फ्री में दी जातीं, लेकिन अब यह कूड़े में फेंकी जाएंगी। इस संबंध में जयपुर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं के निदेशक (जन स्वास्थ्य) ने जोधपुर सीएमएचओ डॉ. बलंवत मंडा को सही मॉनिटरिंग नहीं करने पर कारण बताओ नोटिस दिया है।

दरअसल उनके अधीन आने वाले चिकित्सा संस्थानों में ई औषधि सॉफ्टवेयर में दवाओ की पर्ची शत प्रतिशत इन्द्राज नहीं होने और बार-बार कहने के बाद भी मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना की सहीं मॉनिटरिंग नहीं होने पर कारण अक्टूबर 2020 में 8 लाख 75 हजार 482 मूल्य की दवाएं अवधि पार हो गई।

जिसके चलते हाल में डायरेक्टर केके शर्मा ने कारण बताओ नोटिस दिया है। नोटिस के अनुसार सीएमएचओ को ई-औषधि सॉफ्टवेयर में दवा पर्चियों का शत-प्रतिशत इंद्राज समय पर करवाने, दवाओं की मॉनिटरिंग एवं भौतिक सत्यापन करने के लिए निर्देशित किया गया था।

इसके बावजूद मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना की सही मॉनिटरिंग नहीं करने से सीएमएचओ के अधीन आने वाले चिकित्सा संस्थानों में अक्टूबर 2020 में 8,75,482 रु. की दवाएं अवधि पार हो गईं। साथ ही अन्य कई निर्देश की पालना नहीं करने के कारण सीएमएचओ से सात दिन के अंदर कारण बताओ नोटिस पर जवाब मांगा है। यदि 7 दिन में जवाब नहीं आता है तो राजस्थान सेवा नियम के अनुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित कर दी जाएगी।

निदेशालय ने कई बार कहा- दवाइयां समय पर काम ले लें
निदेशालय से सीएमएचओ को जुलाई से नवंबर तक सात बार पत्र लिखकर उन्हें मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना की मॉनिटरिंग करने के लिए कहा गया था। 13 अक्टूबर को पत्र द्वारा राज्य के सभी जिलों में 60 दिन में एक्सपायर होने वाली 4,97,13,236 रु. की दवाइयां समय रहते उपयोग लेने को निर्देशत किया। निदेशालय ने 10 दिन बाद 23 अक्टूबर को पुन: स्मरण पत्र भेज फिर नियर एक्सपायरी दवाओं के उपयोग को निर्देशित किया। 10 नवंबर को फिर पत्र भेज 2,09,91,385 रु. की दवाओं के प्रयोग के लिए कहा।
कोरोनाकाल में साॅफ्टवेयर में आधा रह गया पर्ची इंद्राज

  • मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना में ई औषधि सॉफ्टवेयर में कोरोना से पूर्व प्रतिदिन 3 लाख पर्चियों को इंद्राज हो रहा था। महामारी शुरुआत के बाद वह 1.5 लाख रह गया। इस पर निदेशालय ने 2 जुलाई को पत्र लिखकर पर्चियों के शत-प्रतिशत इंद्राज के लिए निर्देशित किया। जिन चिकित्सा संस्थानों में ऐसा नहीं हो रहा, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाही कर सात दिन में निदेशालय को बताना था
  • निदेशालय ने 29 जुलाई को फिर पत्र लिखकर समस्त ओपीडी रोगियो की दवा पर्चियों का इंद्राज ई-औषधि सॉफ्टवेयर में शत-प्रतिशत किए जाने एवं ऑफलाइन दवाईयो के उपभोग को गबन की श्रेणी में मानने के निर्देश दिए। सभी चिकित्सालयों के सब स्टोर एवं डीडीसी का भौतिक सत्यापन 31 जुलाई तक करने के निर्देश दिए थे।
  • निदेशालय ने 9 सितंबर को फिर पत्र लिखा। इसमें निर्देशित किया कि एक अगस्त से 31 अगस्त तक साॅफ्टवेयर में इंद्राज पर्चियों के कार्य दिवस 0 से 10, 11 से 20 एवं 20 से अधिक के इंद्राज की सूचना 1 से 10 दिवस तक ही पर्चियों का इंद्राज करने वाले चिकित्सा संस्थानों के प्रभारी अधिकारियों एवं विरुद्ध कार्यवाही करें।
  • 15 सिंतबर को पत्र में निदेशालय ने मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजनों के ई औषधि साॅफ्टवेयर में ऑफलाइन इंडेंट बंद करने के निर्देश दिए।


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Such negligence even in the epidemic period, 8.75 lakh free medicines have expired


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