सप्तपर्ण, कुटकी, चिरायता और कुबेराक्ष से तैयार ‘आयुष-64’ असरदार व सुरक्षित

(सुरेन्द्र स्वामी). कोरोना को हराने के लिए वैक्सीन तैयार हो रही है, जबकि आयुर्वेदिक ‘औषधियों न केवल ज्यादा असरदार बल्कि सुरक्षित मानी जा रही हैं। सप्तपर्ण, कुटकी, चिरायता और कुबेराक्ष से तैयार ‘आयुष-64’ दवा को कोविड संक्रमित मरीजों को देने पर अच्छे परिणाम देखने को मिले है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान जोधपुर में भर्ती 30 कोविड मरीजों को दिन में दो बार यानि सुबह-शाम ‘आयुष-64’केप्शूल दिया गया।

जिससे 21 मरीज यानी 70 फीसदी दवा देने के 5वें दिन ही आरटी-पीसीआर की जांच कराने पर नेगेटिव हो गए। जिन 30 मरीजों को आयुष-64 नहीं दी, उनमें से मात्र 16 मरीज ही पांचवे दिन पॉजिटिव से निगेटिव हुए। सुखद बात ये है कि आयुष-64 नहीं देने वाले किसी भी मरीज को ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के तहत किसी भी तरह का साइड इफैक्ट नहीं हुआ।

क्लीनिकल ट्रायल पायलट बेसिस पर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर के सहयोग से एम्स जोधपुर में भर्ती कोविड मरीजों पर किया गया। अध्ययन के लिए जोधपुर एम्स के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर डॉ.पंकज भारद्वाज और को -प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर के डॉ.पवन कुमार गोदतवार की मॉनिटरिंग में हुआ। अब राष्ट्रीय स्तर पर शोध प्रकाशित करने के लिए भेजा जा रहा है।
‘आयुष-64’ औषधि एक एंटीवायरल दवा है
सप्तपर्ण, कुटकी, चिरायता और कु्बेराक्ष से तैयार आयुष-64 मलेरिया में काम में आने वाली दवा है। जिसे एंटीवायरल के नाम से जाना जाता है। सैन्ट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज (सीसीआरए) ने दवा तैयार की है। जिसका राजस्थान समेत गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल में ट्रायल चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार सप्तपर्ण, कुटकी, चिरायता और कुबेराक्ष से तैयार औषधि से वायरस को कम समय में खत्म कर देता है।

ऐसे तैयार की ‘आयुष-64’ : चार तरह की औषधियों की मिश्रण

1. सप्तपर्ण : यह देशभर में आसानी से उपलब्ध होने वाला एक तरह से नीम जैसा वृक्ष होता है, जिसके पत्तियों से रस निकाला जाता है।
2. कुटकी : हिमालय की तलहटी में पाया जाने वाला अदरक जैसा है, जिसकी जड़ों से रस निकालते है।
3. चिरायता : हिमालय की तलहटी में पाया जाने वाला एक तरह से छोटा पौधा है, जिसे पूरा काम में लेते है।
4. कुबेराक्ष: देशभर में कुबेराक्ष आसानी से उपलब्ध हो जाता है। जिसके बीज से रस निकाला जाता है।

होम्योपैथिक का असर : कोविड संक्रमित मरीजों को आक्सीजन सिलैंडर नहीं लगाना पड़ा : आरयूएचएस में भर्ती 60 कोविड मरीजों को आर्सेनिक एल्बम, ब्रायोनिया एल्बा और जेल्सीमियम होम्योपैथिक दवा देने के बाद ऑक्सीजन सिलैंडर नहीं लगाना पड़ा। सरकार की अनुमति लेकर आरयूएचएस में भर्ती 60 कोविड को लक्षणों के आधार पर 11 फीसदी मरीजों को आर्सेनिक एल्बम, 80 फीसदी मरीजों को ब्रायोनिया एल्बा और 4 फीसदी को जेल्सीमियम दवा दी।

दवा देने के बाद 44 फीसदी मरीज तो 2 से 5 दिन, 25 फीसदी 6 से 9 दिन और 31 फीसदी 10 से 14 दिन में नेगेटिव होकर घर चले गए। सीएमएचओ जयपुर प्रथम के अधीन कार्यरत आयुष डॉ.सतीश मिश्रा की देखरेख में डॉ.अशोक सिंह सोलंकी, डॉ. भीखाराम कुमावत, डॉ.जयराम चौधरी ने कोविड संक्रमित मरीजों को होम्योपैथिक दवा दी।

^ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान जोधपुर में भर्ती 60 कोविड मरीजों पर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने आयुष-64 का क्लीनिकल ट्रायल किया है। जिसके अच्छे परिणाम सामने आए है। जिन 30 कोविड मरीजों को आयुष-64 दवा देने वालों में 21 मरीज पांचवे दिन ही आरटी-पीसीआर जांच में नेगेटिव हो गए। किसी भी मरीज को दूसरे अस्पताल में रैफर नहीं किया। और किसी तरह का साइड इफैक्ट देखने को नहीं मिला।
-डॉ.संजीव शर्मा, निदेशक, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर



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'AYUSH-64' made from Saptaparna, Kutki, Chiraitya and Kuberaksha is effective and safe


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