न्यायालय विशिष्ट न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ) न्यायाधीश प्रमोद कुमार मलिक ने 13 साल पुराने रिश्वत के मामले में मुकदमे में बंद नहीं करने और मामले को रफा-दफा करने की एवज में 1300 रुपए की रिश्वत लेने के मामले में आरोपी पुलिस थाना देई के तत्कालीन एएसआई को 3 साल का कारावास सुनाया है। साथ ही 50 हजार का जुर्माना भी लगाया है।
लोक अभियोजक जया गौतम ने बताया कि परिवादी गिर्राज मीणा, पिता मोतीलाल मीणा निवासी ग्राम देवरिया ने 5 अगस्त 2007 को एसीबी बूंदी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि गांव में झगड़ा होने पर पुलिस थाना देई ने दोनों पक्षों के बीच राजीनामा करवा दिया था। मामले में एसीबी ने 6 अगस्त 2007 को 1300 रुपए की रिश्वत लेते हुए आरोपी एएसआई अब्दुल गफूर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। एसीबी ने 13 मई 2008 को आरोपी के विरुद्ध चालान पेश किया था।
अभियोजन पक्ष की ओर से 15 गवाहों के बयान कराए। न्यायालय का मत लेखराज द्वारा परिवादीगण के विरुद्ध प्रस्तुत परिवाद को अभियुक्त अब्दुल गफूर द्वारा लोक कर्तव्यों के निर्वहन में सक्षम प्राधिकारी की हैसियत से निष्पक्ष रूप से जांच करने की विधि प्रशासनिक जिम्मेदारी थी।
इधर, घूसखाेर आबकारी निरीक्षक को जमानत नहीं
न्यायालय विशिष्ट न्यायाधीश ( भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) न्यायाधीश प्रमोद कुमार मलिक ने घूस के मामले में आरोपी आबकारी निरीक्षक शिवप्रताप सिंह राणा की जमानत अर्जी खारिज कर दी। एसीबी बूंदी ने 10 हजार की घूस लेते हुए आबकारी निरीक्षक शिवप्रताप व सिपाही रामनिवास को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
न्यायालय ने अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी को जमानत का लाभ दिया जाता है तो इससे इस प्रकार के अपराध करने वाले अपराधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और अपराध में बढ़ोतरी होगी। प्रकरण में अनुसंधान जारी है। प्रकरण के गुणवगुण पर किसी प्रकार की टिप्पणी किए बिना, प्रकरण के समस्त तथ्य एवं परिस्थितियों एवं अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की ओर से प्रस्तुत जमानत का प्रार्थना पत्र खारिज किया जाता है।
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