दशहरा-दीवाली मेले के बाद कोरोना ने हमारी एक और रौनक छीनी शिल्पग्राम मेला 31 साल बाद नहीं होगा, 10 करोड़ का सीधा नुकसान
कोरोना वायरस सेहत के साथ अब हमारी रौनक भी छीनता जा रहा है। दशहरा-दीवाली मेला रद्द होने के बाद 31 साल के इतिहास में पहली बार 21 से 31 दिसंबर तक हर साल होने वाला शिल्पग्राम महोत्सव भी टल गया। इससे जहां एक मंच पर 23 राज्यों की कला और संस्कृति का मिलन नहीं होगा, वहीं महोत्सव में शामिल होने वाले डेढ़ लाख पर्यटकों के नहीं आने से शहर के राजस्व को 10 करोड़ का सीधा नुकसान होगा। हालांकि पश्चिमी सांस्कृतिक केंद्र ने संस्कृति मंत्रालय, वेस्ट जाेन चेयरमैन और प्राेग्राम कमेटी काे प्रपाेजल देकर महाेत्सव की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है।
दिसंबर में होने वाले इस महोत्सव की तैयारी दाे माह पहले शुरू हाे जाती है, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हाे रहा। ना तो कलाकारों को निमंत्रण दिया गया है, ना व्यवस्थाओं काे लेकर टेंडर निकाले गए हैं और ना ही दुकानें नीलाम की गई हैं। कोरोना वायरस का असर कम होने और सख्ती हटने के बाद अगर केंद्र को अनुमति मिलती भी है तो भी वह जनवरी के आखिर में या फरवरी के पहले सप्ताह से पहले यह महाेत्सव नहीं करवा सकेगा। ऐसे में 2021 में महाेत्सव दाे बार शिल्पग्राम महोत्सव हो सकता है।
2019 में स्टाॅल संचालकों काे 3.35 कराेड़ की हुई थी आमदनी
- 2019 में हैण्डीक्राफ्ट की 395 दुकानाें और 52 फूड स्टाॅल लगे थे। इससे स्टाॅल संचालकों काे 3.35 कराेड़ रुपए की आमदनी हुई थी।
- महाेत्सव के लिए 2 महीने पहले हाेती है तैयारी शुरू
- कलाकारों काे भेजा जाता है आमंत्रण, जाे नहीं भेजा
- दुकानों के आंवटन की प्रकिया भी नहीं हुई : इसमें लाइटों और दूसरी व्यवस्थाओं के टेंडर भी नहीं हुए।
- सांस्कृतिक कार्यक्रमाें की रूपरेखा बनती थी, जाे नहीं बनी
ये व्यंजन प्रसिद्ध : दाल-बाटी, गुजरात के ढाेकला, खांडवी अाैर थेपला, महाराष्ट्र की बाकरवाड़ी, पुरनपाेली, हैदराबाद की बिरयानी और पंजाब के छाेले-कुल्चे फेमस है।
इन क्राफ्ट की रहती हैं डिमांड : मणिपुर के आर्टिफिशियल फूल, असम का कैन एंड बेम्बू क्राफ्ट, कश्मीर की पश्मीना शाॅल, कच्छ, बाड़मेर, जैसलमेर और महाराष्ट्र का क्राफ्ट की काफी डिमांड रहती है।
23 राज्यों के कलाकार दिखाते हैं कला : महोत्सव में हर साल 23 राज्यों के कलाकार अपनी संस्कृति और कला को शिल्पग्राम में बिखेरते हैं। यहां राजस्थान, मणिपुर, मिजाेरम, असम, त्रिपुरा, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलगांना, कर्नाटक, पांडिचेरी, झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, नागालैंड, उत्तराखंड, लद्दाख, गुजरात, महाराष्ट्र, दमन-दीव राज्यों के कलाकार आते हैं।
इधर, कुंभलगढ़ फेस्टिवल भी रद्द
1 से 3 दिसंबर काे हर साल हाेने वाला कुंभलगढ़ फेस्टिवल भी इस बार नहीं हाेगा। यह आयाेजन पर्यटन विभाग की तरफ से हाेता है। महाेत्सव में तीन दिनाें में करीब 7 हजार पर्यटक आते हैं। इसमें पर्यटकाें काे निशुल्क एंट्री दी जाती है। इस दाैरान दुर्ग में जाने का भी टिकट नहीं लगता है। महाेत्सव में तीन दिनाें तक राजस्थानी संस्कृति काे लेकर कार्यक्रम हाेते हैं। रात में राष्ट्रीय स्तर के कलाकार भी प्रस्तुति देते हैं।
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