भजन संध्या में झूमे श्रोता, जैन इंद्र व इंद्राणियों ने 256 अर्घ्य समर्पित किए

अतिशय क्षेत्र खंडार के तेरापंथी दिगंबर जैन मंदिर पर ब्रह्मचार्य हरीश भैयाजी के सानिध्य में चल रहा आठ दिवसीय सिद्ध चक्र मंडल विधान कार्यक्रम बड़े उत्साह व उमंग के साथ मनाया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान गुरुवार देर शाम 108 दीपकों से भगवान महावीर की महाआरती की गई।

इसके बाद ब्रह्मचार्य हरीश भैयाजी ने शास्त्र स्वाध्याय के दौरान बोलते हुए कहा कि सिद्ध चक्र मंडल विधान से मनुष्य के अनंत पाप औैर व्याधियां दूर होते है। उन्होंने कहा कि पड़ौसियों, सगे संबंधियों एवं भाईयों से हमारे संबंध विच्छेद हो सकते है लेकिन भगवान से हमारे संबंध कभी भी विच्छेद नहीं हो सकते।

दुनिया में व्यक्ति का धर्म ही एक मात्र सहारा है। धर्म का सहारा लेने वाला व्यक्ति कभी भी बेसहारा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अगर व्यक्ति के मन में संशय का भाव है तो उसकी जीवनरूपी नैया कभी भी पार नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि संतों के वचन कभी झूठे नहीं होते मनुष्य को संतों के वचनों का अनुसरण करना चाहिए। संकट के समय जब मनुष्य के सभी दरवाजे बंद हो जाते है मित्रों, सगे संबंधियों के द्वार तक भी बंद हो जाते है तब भी प्रभू का द्वार उसके लिए हमेशा खुला रहता है।

अगर व्यक्ति का भगवान में निष्ठा का भाव है तो उसका कोई भी बाल बांका नहीं कर सकता। जिसमें टीकमगढ़ से पधारे भजन गायकों ने जीवन है पानी का मोल, श्रीवर जीनेंद्र के पूजन से कटता है कर्मों का फेरा, कलियुग में ऐसा चमत्कार हो जाए मेरे प्रभू का फिर अवतार हो जाए जैसे भजन सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शुक्रवार सुबह भगवान जिनेंद्र के शांतिधारा अभिषेक के बाद संगीतमय मंडल विधान पूजा की शुरूआत हुई। पूजा के दौरान जैन इंद्र इंद्राणियों ने 256 अर्घ्य समर्पित किए।



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Listeners, Jain Indra and Indranis dedicated 256 Arghya in Bhajan Sandhya


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