(दीपक आनंद). नॉन प्रोफिटेबल ऑर्गेनाइजेशन होने का दावा करने के बाद भी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी नीट के आवेदन शुल्क को समय समय पर बढ़ा रही है। इस कारण नीट के एप्लीकेशन फॉर्म के जरिए ही एजेंसी को करोड़ों रुपए प्राप्त हो रहे हैं। साल 2020 में ही एनटीए को 200 करोड़ रुपए तो मात्र आवेदनों से ही हासिल हुए। वहीं साल 2019 में 192 करोड़ रुपए आवेदनों के शुल्क से प्राप्त हुए थे।
यह खुलासा आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. विवेक पांडे द्वारा लगाई गई आरटीआई में हुआ। विवेक ने जब एनटीए से नीट के खर्च का ब्यौरा मांगा तो एजेंसी ने नियमों का हवाला देते हुए इंफॉर्मेशन ब्रोशर से जानकारी हासिल करने को कहा। इस आरटीआई के जवाब में ही एनटीए ने खुद को नॉन प्रोफिटेबल ऑर्गेनाइजेशन बताया है।
दूसरी ओर, एआईपीएमटी से लेकर नीट तक समय-समय पर आवेदन शुल्क में बढ़ोतरी की जा रही है। साल 2013 में परीक्षा का आवेदन शुल्क सामान्य कैटेगिरी में एक हजार रुपए था, जो अब बढ़कर 1500 रुपए तक पहुंच गया है। एक पहलू यह भी है कि जेईई मेन में लड़कियों के लिए आवेदन शुल्क लड़कों से कम रखा जाता है, लेकिन नीट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
जनरल कैटेगिरी में आने वाले सभी कैंडिडेट्स को 1500 रुपए शुल्क के देने होंगे। नीट ऑफलाइन होता है, इस कारण जेईई-मेन की तरह इसमें टेक्निकल सपोर्ट की अधिक जरूरत नहीं होती है। विवेक पांडे ने बताया कि एनटीए की पारदर्शिता पर सवाल इसीलिए भी खड़े होते हैं, क्योंकि एनटीए अपनी ऑडिट रिपोर्ट भी जारी नहीं करता है। इसके अलावा आरटीआई का स्पष्ट उत्तर टेस्टिंग एजेंसी ने नहीं दिया है।
चैलेंजेस से ही कमाए 1.38 करोड़
साल 2019 में सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आया था कि एनटीए ने जेईई मेन व नीट की आंसर की पर किए गए चैलेंजेस से 1.38 करोड़ रुपए कमाए थे। 7755 चैलेंजेस जेईई मेन की आंसर की और 6122 चैलेंजेस नीट की आंसर की पर किए गए थे। प्रति आंसर को चैलेंज करने का शुल्क एक हजार रुपए होता है। यह शुल्क तब ही वापस किया जाता है, जब छात्र का चैलेंज सही होता है। छात्र के चैलेंज को खारिज करने के पीछे एनटीए किसी प्रकार का जबाव भी नहीं देता है।
आवेदन शुल्क बढ़ाने का खुलासा नहीं
इससे पहले आईआईएम के एंट्रेंस एग्जाम कैट और आईआईटी एंट्रेंस जेईई एडवांस्ड की परीक्षा में वसूले जाने वाले शुल्क पर भी सवाल खड़े हो चुके हैं। आवेदन शुल्क बढ़ाने के कारण का भी परीक्षा एजेंसियां खुलासा नहीं करती हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि परीक्षा की प्रोसेस की गोपनीयता के साथ खर्च के संबंध में भी पारदर्शिता रखनी चाहिए।
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