1.72 लाख हेक्येटर में 41.28 लाख क्विंटल नरमा उत्पादन, गेहूं बिजाई करने काे ताेड़े टिंडे घरोंं की छताें पर खिले

ये महिलाएं सफेद साेना यानी नरमा के खिले हुए टिंडाें के खेत में नहीं बल्कि घराें की छताें पर बैठी हुई हैं। दरअसल इन दिनाें किसानाें के करीब हर घर में इसी तरह नरमे के खिले हुए टिंडे छताें पर चुगाई करने काे महिलाएं जुटी हुई हैं। क्याेंकि किसानाें ने नरमा के खेत खाली करने काे खड़ी फसल के टिंडे अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में तुड़वाकर घराें की छताें पर भर दिए थे।
इससे किसानाें के खेत जल्दी खाली हाे गए और उसी खेत में अगेती गेहूं की बिजाई की जा चुकी है। अब घराें की छताें पर भरे ये टिंडे जैसे-जैसे धूप और समय बीत रहा है, खिलते जा रहे हैं। छताें पर भरे हरे टिंडे अब खिलकर सफेद चादर बनते जा रहे हैं। इन टिंडाें की चुगाई ठीक वैसे ही हाेती है जैसे खड़ी नरमा की फसल में नरमा चुगाई हाेती है। नरमा की अधिक बिजाई करने वाले अधिक जमीनाें वाले बड़े किसानाें के घराें की छताें और जमीन पर बिछाए ये टिंडे जैसे-जैसे खिलते जाते हैं, वैसे-वैसे मजदूर महिलाएं इनकाे चुनकर इकट्ठा करती रहती हैं। इसके बदले भी उनकाे पूरी मजदूरी मिलती है।

2 लाख क्विंटल नरमा खेतों में खड़ी फसल से ताेड़े गए टिंडाें से प्राप्त हाेता है

कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. जीआर मटाेरिया के अनुसार इस बार जिले मेंं एक लाख 72 हजार हेक्टेयर में नरमा की बिजाई की हुई थी। एक हेक्टेयर में औसत उत्पादन 24 क्विंटल का अनुमान है। इस हिसाब से जिले में 41 लाख 28 हजार क्विंटल नरमा का उत्पादन हाेने की उम्मीद है। विशेषज्ञाें की मानें ताे करीब दाे लाख क्विंटल उत्पादन नरमा की खड़ी फसल से ताेड़े गए टिंडाें से ही हाे जाता है।



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Producing 41.28 lakh quintals of soft wheat in 1.72 lakh hectare, sowing of wheat in the shade of houses


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