पहली बार चंबल अभयारण्य की राजस्थान सीमा में दुर्लभ प्रजाति चित्रा इंडिका के 114 बच्चे मिले, नदी में छुड़वाए

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की राजस्थान सीमा में अब कछुआ संरक्षण काे बल मिला है। जहां एक ओर पहली बार राजस्थान की सीमा में दुर्लभ प्रजाति के कछुआ चित्रा इंडिका का नेस्ट मिला वहीं उसमें कछुआ के 114 बच्चे मिले। जिन्हें सुरक्षित चंबल में छाेड दिया गया।

वाइल्ड लाइफ प्रबंधन ने राजस्थान की चंबल सीमा में कछुओं काे संरक्षण देने की दिशा में 8 लाख रुपए दिए हैं, इससे चंबल नदी किनारे कछुआ हैचरियाें में ग्रामीणाें, वनकमिर्याें, विशेषज्ञाें की मदद से अंडे ढूंढकर हैचरी में प्राकृतिक हैचिंग कराकर कछुओं काे पालकर 60 से 90 दिन के बीच में इन कछुओं के बच्चाें काे नदी में छाेडा जाएगा। अब दुर्लभ प्रजातियाें के इन कछुओं काे संरक्षण देने के लिए चंबल में नया प्राेजेक्ट शुरू हाे रहा है।
पैसा देरी से मिला, इसलिए चित्रा इंडिका, निलसाेनिया गेंजेटिका, यूरम के अंडे नहीं जा सके हैचरी

अभी चंबल नदी किनारे राजस्थान सीमा में दुर्लभ प्रजाति चित्रा इंडिका का नेस्ट मिला, जिसमें 114 अंडाें से बच्चे निकले थे। चंबल अभयारणय के अफसर इसलिए खुश हैं कि चित्रा इंडिका का प्राकृतिक आवास में हैच हुआ है। जिसके लगभग 20 बच्चे नदी में जा चुके थे और 82 बच्चों काे नेस्ट से निकालकर प्राकृतिक परिवेश में सुरक्षित चंबल में छाेड दिया गया है।

वहीं दाे बच्चे मरे और दस अंडे खराब हाे गए थे। चित्रा इंडिका छाेटे सिर वाला काेमल कवच वाला कछुआ का रंग कहिया व हरे रंग का हाेता है। ये शारदा, घाघरा, गंगा, गाेदावरी, सिंध, काेवरी, कृष्णा आदि नदियाें में पाए जाते हैं। इनके सूंघने की क्षमता अधिक हाेती है और पानी में काफी दूर हुई आहट काे ये भांप लेते हैं। ये आंखाें से पानी में हलचल काे भांपते हैं। हैचरी के लिए पैसा समय पर नहीं मिलने के कारण कछुओं के संरक्षण में थोड़ा व्यवधान आया। लेकिन अब जनवरी से इनका संरक्षण हो सकेगा।

जनवरी से हैचरी में क्रिटिक्रली इंजर्ड बाटागुर और बाटागुर डाेंगाेका कछुआ का करेंगे संरक्षण
^चंबल में कछुआ संरक्षण के लिए आठ लाख रुपए मिल गए हैं। अब हैचरियाें में अंडाें काे चंबल में बने घाेंसलाें से लाकर इनका हैचरियाें में प्रजनन कराकर इनकाे पालकर चंबल में छाेडा जाएगा। अब तक इनके आवास सुरक्षित नहीं थे, इसलिए अंडे नष्ट हाे जाते थे। चित्रा इंडिका सहित अन्य साफ्ट सेल का इस बार हैचरी में संरक्षण नहीं हाे सकेगा, क्याेंकि पैसा देरी से मिला है, लेकिन हार्ड सेल प्रजाति के कछुआ जिसमें क्रिटिक्रली इंजर्ड बाटागुर कछुआ रेड क्राउंन रुफ्ड टटर्ल और बाटागुर डाेंगाेका के अंडाें काे जनवरी से हैचरियाें में लाकर इनके संरक्षण पर काम हाेगा। कछुआ प्रजाति को संरक्षण मिलने के बाद अब जिले में इनकी संख्या बहुतायत में होगी। जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकेगा।
फुरकान अली खत्री, उपवन संरक्षक, चंबल राष्ट्रीय अभयारण्य



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114 children of rare species Chitra Indica found in the border of Chambal Sanctuary for the first time, got released in the river


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