सआदत अस्पताल में आमूलचूल परिवर्तन के सपने दिखाए जा रहे हैं। जबकि वास्तविक स्थिति इसके विपरीत है। चौकाने वाली बात यह है कि सुविधाएं बढ़ने के स्थान पर अस्पताल में मरीजों को सुविधाएं कम मिल रही है।
आलम यह है कि पिछले 10 माह से सआदत अस्पताल में मरीजों को मिल रही डायलिसिस की सुविधा बंद है।
ऐसे में जिले के मरीजों को निजी अस्पताल या फिर जयपुर जाकर डायलिसिस उपचार का लाभ लेना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों को आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल से सआदत अस्पताल में पीपीपी मोड पर मरीजों को डायलिसिस सुविधा का लाभ मिल रहा था।
करीब 25 लाख की लागत से उपलब्ध मशीन गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीजों की स्थानीय स्तर पर ही डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध थी। इसमें बीपीएल, सीनियर सीटीजन समेत अन्य श्रेणियों के मरीज निशुल्क लाभान्वित हो रहे थे, जबकि सामान्य मरीजों से करीब 9 सौ रुपए का शुल्क लिया जाता था। प्रत्येक माह करीब 6 से 8 मरीजों काे सुविधा का लाभ भी मिल रहा था। इसके बावजूद गत जनवरी माह से डायलिसिस जांच व उपचार केन्द्र पर ताला लटका हुआ है। ऐसे में अस्पताल आ रहे मरीज निराश लौट रहे है।
कारण- बिना प्रचार प्रचार के मरीजों को जानकारी नहीं
मरीजों व परिजनों का कहना है कि अस्पताल में डायलिसिस सुविधा मिलने से प्रति सप्ताह करीब 30 मरीज लाभान्वित हो रहे थे। एकाएक केन्द्र बंद कर स्टाफ हटा लिए जाने से गुर्दे-किडनी के मरीजों को निजी अस्पताल या फिर जयपुर जाकर डायलिसिस जांच करानी पड़ रही है।
दूसरी ओर डायलिसिस कम्पनी के कर्मचारियों का कहना है कि मरीज कम आने से कम्पनी को खर्चे के मुताबिक लाभ नहीं मिल रहा था। ऐसे में उन्हें पीपीपी मोड पर दी जा रही डासलिसिस सुविधा बंद करनी पड़ी। इधर, लाेगों ने घाटे का कारण बिना प्रचार प्रचार व अधिक मरीजों को जानकारी नहीं होना बताया।
लैब टैक्नीशियनों की कमी से अन्य जांचें भी प्रभावित
जिले के सबसे बड़े सआदत अस्पताल में नि:शुल्क जांच योजना मरीजों को तकलीफ दे रही है। शहरी समेत ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज उपचार कराने आते है। इनमें दो सौ से अधिक मरीज विभिन्न जांचों के लिए अस्पताल व जांच केन्द्र के बीच चक्कर लगाते दिखाई देते है।
आलम यह है कि चिकित्सा विभाग की ओर दावा तो 56 प्रकार की जांचे नि:शुल्क किए जाने का किया जा रह है, जबकि वास्तविकता यह है कि कई जांचे मरीजों की नहीं हो रही। इससे मरीजों को जेब ढीली कर बाजार से जांच करानी पड़ रही है। उल्लेखनीय है कि 15 स्थायी लैब टेक्निशियनों के मुकाबले भी 7 ही कार्यरत है।
फिलहाल डायलिसिस सुविधा बंद है
^सआदत अस्पताल में पूर्व में मरीजों का पीपीपी मोड पर डायलिसिस सुविधा का लाभ मिल रहा था। बीपीएल, सीनियर सीटीजन व अन्य कुछ श्रेणियों के मरीज निशुल्क सुविधा से लाभान्वित हो रहे थे। पिछले कुछ महीनों से यह सुविधा बंद है। इसके बारे में उच्चाधिकारी ही अधिक बता सकते है।
-डाॅ. नवीन्द्र पाठक, पीएमओ, सआदत अस्पताल टोंक।
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