लॉकडाउन के बाद दीपावली पर जिले के सीनियर सिटीजन के लिए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक आधारित भुगतान प्रणाली सहूलियत के रूप में काम आई है। लॉकडाउन में डाकियों के जरिए सीनियर सिटीजन रोजाना 5 लाख रुपए तक की नकदी रोजाना निकाल रहे थे।
अब रोजाना करीब 10 लाख रुपए की नकदी रोजाना निकाली जा रही है। एईपीएस की प्रक्रिया बड़ी आसान है, कोई भी व्यक्ति जिसका एकाउंट चाहे किसी भी बैंक में हो, यदि उसका आधार कार्ड नंबर बैंक खाते से लिंक है तो वह अपने किसी भी नजदीकी डाकघर में जाकर या अपने क्षेत्र में डाक वितरण के लिए आने वाले पोस्टमैन (चलते फिरते एटीएम) से घर बैठे नकद भुगतान प्राप्त कर सकते है।
पनेर ( रूपनगढ़) के ब्रांच पोस्टमास्टर कैलाशचंद्र मीना ने बताया कि लॉकडाउन पीरियड अप्रैल-2020 से लेकर अब तक 2962 बैंक खाता धारकों को 1 करोड़ 19 लाख से ज्यादा का भुगतान कर चुके हैं। मीणा ने राजस्थान डाक सर्किल के पहले कर्मचारी होने का गौरव प्राप्त किया है।
लॉकडाउन से अब तक अजमेर डाक मंडल द्वारा 72 हजार 507 बैंक खाता धारकों को करीब सवा 21 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। इसमें अजमेर प्रधान डाकघर के कर्मचारियों ने 19 हजार से ज्यादा खाता धारकों को साढ़े 6 करोड़ का भुगतान किया है। अजमेर डाक मंडल में सर्वाधिक बैंक खाता धारकों को भुगतान करने का रिकॉर्ड पोस्टमैन कमरु मेहरात ने बनाया हे। इन्होंने करीब 3 हजार खाताधारकों को करीब 92 लाख रुपए का भुगतान किया है। यह योजना
वृद्ध, दिव्यांग, चलने फिरने में असमर्थ लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध हुई है।
इनका कहना है
लॉक डाउन के बाद दीपावली के मौके पर घर बैठे भुगतान पाने के लिए वरिष्ठ नागरिकों में उत्साह रहा। डाक विभाग बिना शुल्क के यह काम कर रहा है। कुछ कर्मचारियों ने इस योजना को सफल बनाने में रिकॉर्ड काम किया और अच्छे परिणाम भी दिए है।
-पवन कुमार शर्मा, डाक प्रवर अधीक्षक, अजमेर
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