लॉक डाउन के बाद देशभर में संचालित की जा रही रहीं करीब 350 से अधिक स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों को एक बार फिर मनपसंद खाना मांगने की सुविधा मिलेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि लॉक डाउन के बाद एक बार फिर आईआरसीटीसी ने स्टेशनों पर बनी फास्ट फूड यूनिट को पका हुआ स्टैंडर्ड खाना देने की अनुमति दे दी है।
इन आदेशों के बाद जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर सहित देश के सभी बड़े स्टेशनों से यात्री फूड प्लाजा से राजमा, छोले, दाल और कड़ी - चावल, मंचूरियन, पिज्जा, बर्गर जैसे स्वादिष्ट और मनचाहे भोजन मंगा सकते हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि आईआरसीटीसी की जयपुर यूनिट और रेलवे जे कॉमर्शियल विभाग के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से जयपुर के यात्रियों को यह सुविधा नहीं मिल सकेगी।
आरआर और फूड प्लाजा बंद पड़े, जन आहार पर सुविधा नहीं
जयपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर स्थित रेलवे रिफ्रेशमेंट रूम (आरआर) पिछले एक साल से बंद पड़ा है। पहले टेंडर विवाद के चलते यह काफी दिनों तक बंद रहा। लेकिन अब आईआरसीटीसी ने इसका टेंडर ही रद्द कर दिया। उधर लॉक डाउन से पहले से बंद पड़े फूड प्लाजा का टेंडर इटारसी की एक निजी फर्म को हो गया है। लेकिन लाइसेंस फीस बचाने के कारण कंपनी फूड प्लाजा को रेनोवेशन के नाम पर बंद किए हुए है।
इसे भी बंद हुए करीब आठ माह का समय हो गया है। तो वहीं जन आहार 7 अक्टूबर से शुरू तो कर दिया गया है। लेकिन यात्री नहीं होने की आड़ में यहां भी ना तो मनचाहा खाना मिल पा रहा है और ना ही साफ-सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
रेलवे के पास मैनेजर नहीं और आईआरसीटीसी के रीजनल मैनेजर को मतलब नहीं
यात्रियों की इस असुविधा के लिए मुख्य रूप से आईआरसीटीसी के जयपुर रीजनल मैनेजर और रेलवे का कॉमर्शियल विभाग जिम्मेदार है। रेलवे के पास स्टेशन को मैनेज करने के लिए स्टेशन मैनेजर ही नहीं है। करीब एक माह से जयपुर स्टेशन का स्टेशन मैनेजर जैसा महत्वपूर्ण पद खाली है। उधर आईआरसीटीसी के जयपुर रीजनल मैनेजर को दिल्ली में बैठे उच्च अधिकारियों की मेहरबानी होने के कारण यात्रियों की इस परेशानी से मतलब ही नहीं है।
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