बिजली निगमों के निजीकरण के खिलाफ आक्रोश, विरोध में उतरे कर्मचारी संगठन

केंद्र सरकार के विद्युत अधिनियम संशोधन बिल-2020 में बिजली कंपनियों के प्रस्तावित निजीकरण व श्रम कानूनों के बदलाव के खिलाफ कर्मचारी संगठनों में आक्रोश फैल रहा है। कर्मचारी संगठन विरोध में उतर रहे है। राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ(भामस) के बैनर तले निजीकरण के विरोध में शुक्रवार को राममंदिर स्थित पुराना पावर हाउस पर सांकेतिक धरना देकर विरोध दर्ज करवाया।

प्रांतीय विद्युत मंडल मजदूर फैडरेशन (इंटक) ने कोटा, अजमेर सहित अन्य शहरों की बिजली सप्लाई सिस्टम को प्राइवेट हाथों से लेकर बिजली निगमों को वापस देने के लिए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया है। अब लेबर कोड बिल के विरोध में 28 अक्टूबर को प्रदेश के सभी कलेक्ट्रेट दफ्तरों पर प्रदर्शन किया जाएगा।

महासंघ की दलील है कि बिजली निगमों के प्राइवेट हाथों में जाने से जनता को महंगी बिजली मिलेगी तथा कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात होगा। इससे रोजगार के अवसर खत्म होंगे तथा विद्युत दुर्घटनाएं बढ़ेगी। इससे कर्मचारियों व जनता में आक्रोश है।


धरना को संबोधित करते हुए महासंघ के उपाध्यक्ष मधु सूदन जोशी और जयपुर विद्युत वितरण श्रमिक संघ के अध्यक्ष अमित मल्होत्रा ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार कोरोना आपदा को अंधाधुंध निजीकरण के अवसर में बदल रही है। राज्य सरकार ने केंद्र के प्रस्तावित बिजली बिल 2020 व डिस्कॉम के निजीकरण ड्राफ्ट का विरोध दर्ज करवाया, लेकिन विद्युत क्षेत्र के क्लस्टर, एमबीसी, एफआरटी, फ्रैंचाईजी, ग्रिड सबस्टेशन के ओएंडएम के नाम पर निजीकरण को बढ़ावा दे रही है।



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Outrage against privatization of power corporations, workers organizations came out in protest


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