लोकसभा-विधानसभा की तरह अब सरपंच प्रत्याशियों के भी घोषणा पत्र, प्राथमिकताएं बता किए विकास के वादे

अमूमन लोकसभा और विधानसभा चुनाव में राजनीतिक पार्टियां व प्रत्याशी अपने-अपने घोषणा पत्र देती है। अब ये घोषणा पत्र या वादा पत्र पंचायत चुनाव में जारी होने लगे हैं। पंचायतों में सरपंच पद के प्रत्याशियों ने अपने विचार वोटर तक पहुंचाने व प्राथमिक कार्य बताने के लिए घोषणा पत्र छपवाए हैं। इनमें विजयी होने के पश्चात किए जाने वाले कार्यों का ब्यौरा दिया गया है।

किसी ने हर गरीब परिवार में से एक सदस्य को मनरेगा से जोड़ने का संकल्प लिया है तो किसी ने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गेट व सीसीटीवी लगाने का भरोसा दिया है। यही नहीं, कुड़ी से आवासन मंडल की कॉलोनी में जाने के लिए अंडरपास या ओवरब्रिज बनाने के वादे भी घोषणा पत्र में शामिल किए गए हैं।

चूंकि कुड़ी भगतासनी शहर से सटी पंचायतों में सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। यहां 25 हजार से ज्यादा वोटर हैं। इस बार चुनाव में सरपंच पद पर 15 प्रत्याशी खड़े हैं, जिन्होंने वोटर्स के लिए चुनावी घोषणा पत्र बनाए हैं।
कोरोनाकाल में बदला प्रचार : प्रत्याशियों ने बांटे अपने नाम-चिह्न लिखे मास्क

कोरोनाकाल में चुनाव प्रचार के रंग भी बदल गए हैं। अमूमन प्रचार के दौरान प्रत्याशी बैज, कैप और पैंम्फलेट बांटते हैं। लेकिन इस बार चुनाव में प्रत्याशियों के नाम, फोटो और चुनाव चिह्न छपे मास्क भी बांटे जा रहे हैं। कुड़ी पंचायत में भी प्रत्याशी ने ऐसे ही मास्क बांट वोट मांगे।

शहर से सटी सबसे बड़ी ग्राम पंचायत कुड़ी में सरपंच पद के उम्मीदवारों के ये संकल्प
देवीसिंह सिसोदिया

निवर्तमान सरपंच हैं। इस बार भी मैदान में हैं। सिसोदिया ने कहा कि 5 साल में सबके काम किए। सरकारी कॉलेज, पंचायत भवन, राजस्व गांव में डेवलपमेंट व डोर-टु-डोर कचरा संग्रहण का काम कराया। इस बार राजकीय विद्यालय में छात्राओं के लिए कॉमर्स व साइंस के सब्जेक्ट लाना, पार्कों का डेवलपमेंट, सेटेलाइट हॉस्पिटल व खेल मैदान बनाना प्राथमिकता रहेगी।
चंद्रलाल खावा

पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे थे। इस बार भी मैदान में हैं। खावा का कहना है कि 5 साल में कोई काम नहीं हुआ। सड़कें टूटी पड़ी हैं। इस बार वे कुड़ी के सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं, ताकि इसे आदर्श पंचायत बनाया जा सके। स्वच्छ कुड़ी-ग्रीन कुड़ी बनाना, सेटेलाइट हॉस्पिटल, सड़कों का जाल बिछाना और तमाम सरकारी सुविधाएं जुटाने का काम करेंगे।
यूआर बेनीवाल

गत सरपंच चुनाव में बेनीवाल तीसरे नंबर पर रहे थे। इस बार भी चुनाव लड़ रहे हैं। बेनीवाल का कहना है कि यहां 5 सालों में क्षेत्र को समान दृष्टि से नहीं आंका। बाइपास बन रहा है, लेकिन अंडरपास या ओवरब्रिज का प्रावधान नहीं रखा। वे जीतते हैं तो अंडरपास बनाएंगे। आंतरिक सुरक्षा के लिए गेट व सीसीटीवी लगाना, 5 संपर्क सड़कों को बनाना, सफाई-सीवरेज के काम करेंगे।

सत्यनारायण पालीवाल

गत चुनाव में ये उपसरपंच थे, इस बार सरपंच पद पर ताल ठोकी है। इन्होंने सफाई युक्त-अतिक्रमण मुक्त का नारा दिया है। पालीवाल का कहना है कि आबादी के हिसाब से यहां सेटेलाइट अस्पताल की आवश्यकता है। आयुर्वेद अस्पताल भी बनाना होगा। बाइपास पर अंडरब्रिज की बहुत आवश्यकता है। निगम की तर्ज पर सीवरेज-सफाई के वाहन की जरूरत है। क्षेत्र में साफ-सफाई व आवारा पशुओं की समस्या भी सुलझानी होगी। साथ ही अतिक्रमण हटाना भी अहम रहेगा।

डॉ. धर्मेंद्र काला

तीसरी बार पंचायत चुनाव में भाग्य आजमा रहे हैं। काला का कहना है कि बीते 5 साल में विकास के खास काम नहीं हुए हैं। वे चुनाव जीतते हैं तो उनकी प्राथमिकता क्षेत्र को जोड़ने वाली एप्रोच रोड-रामेश्वर नगर, कुड़ी भगतासनी व 6 सेक्टर को जोड़ने, सेंट्रल पार्क को डेवलप करने, क्षेत्र के लिए सीवरेज प्लान करना और सड़क-पानी व बिजली की बुनियादी सुविधाएं देने तथा सबसे अहम क्षेत्र के गरीब परिवार में से एक सदस्य को मनरेगा से जोड़ने की रहेगी।



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Like the Lok Sabha-Vidhan Sabha, now the Sarpanch candidates also announced manifesto, promises of development and stated priorities


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