मारपीट के मामले को लेकर व्यापारी का पासपोर्ट रोका, एडीजे कोर्ट ने दी अनुमति, महानगर मजिस्ट्रेट के आदेश के विरुद्ध पेश की थी निगरानी याचिका

लेशिया, थाइलैंड, सिंगापुर, दुबई, सऊदी अरब आदि देशों में व्यापार के सिलसिले में जाने वाले एक व्यापारी का पूर्ण अवधि इंटरनेशनल पासपोर्ट बनाने की अनुमति नहीं दी गई। इसकी वजह व्यापारी के विरुद्ध मारपीट का मामला विचाराधीन होना बताया गया।

महानगर मजिस्ट्रेट कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर व्यापारी ने निगरानी प्रार्थना पत्र पेश किया, जिसे एडीजे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और कहा कि प्रार्थी को जीविकोपार्जन के लिए विदेश यात्रा के विधिक अधिकार से वंचित किया जाना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है। महानगर मजिस्ट्रेट के आदेश को अपास्त करते हुए पासपोर्ट विभाग को नियमानुसार कार्यवाही कर पासपोर्ट बनाने के आदेश दिए।

मामले के अनुसार बनाड़ रोड निवासी लियाकत अली खान की ओर से निगरानी याचिका दायर कर बताया गया कि वह एक व्यापारी है और सैनिक स्टील सेंटर के नाम से व्यापार करता है। व्यापार के सिलसिले में अक्सर विदेश यात्रा करता है। मलेशिया, थाइलैंड, सिंगापुर, दुबई, सऊदी अरब आदि देशों में पूूर्व में जा चुका है। उसके पासपोर्ट की अवधि गत 18 अगस्त को खत्म होने की वजह से उसने नवीनीकरण के लिए पासपोर्ट कार्यालय में आवेदन किया।

इसमें कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन होने की जानकारी भी दी गई। पासपोर्ट विभाग ने उसे जानकारी दी कि पूर्ण अवधि के इंटरनेशनल पासपोर्ट के लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी होगी। महानगर मजिस्ट्रेट संख्या 5 ने गत 8 सितंबर को अनुमति देने से इनकार कर प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। एडीजे कोर्ट में आदेश को चुनौती दी और कहा कि आदेश अनुचित है, इसलिए निगरानी याचिका स्वीकार की जाए। लाेक अभियोजक भरतसिंह गहलोत ने विधि अनुसार कार्यवाही करने का आग्रह किया।

एडीजे कोर्ट की पीठासीन अधिकारी रैना शर्मा ने दोनों पक्ष सुनने के बाद कहा कि निगरानीकार खान के विरुद्ध आईपीसी की धारा 341, 323 में प्रकरण विचाराधीन है, जिसमें पत्रावली 15 मई 2018 से साक्ष्य अभियोजन के स्तर पर नियत है। गत दो साल से एक भी गवाह लेखबद्ध नहीं होना प्रकट है। कोरोना महामारी की वजह से न्यायिक कार्य भी प्रभावित है। निगरानीकार की पूर्व पासपोर्ट अवधि गत 18 अगस्त को समाप्त हो चुकी है तथा जीविकोपार्जन के लिए विदेश यात्रा के विधिक अधिकार से प्रार्थी को वंचित किया जाना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है।

पासपोर्ट नवीनीकरण के बाद विदेश यात्रा के लिए वीजा आवेदन से पूर्व विचारण न्यायालय से अनुमति लिया जाना आवश्यक है। इस बात की अंडरटेकिंग देगा कि कोर्ट की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं करेगा और विदेश यात्रा की सभी जानकारी विचारण न्यायालय के समक्ष पेश करेगा। कोर्ट ने विचाराधीन मामलों की प्रकृति व प्रार्थी के जीविकोपार्जन को देखते हुए निगरानी प्रार्थना पत्र स्वीकार किया और पासपोर्ट विभाग को उसके आवेदन पर नियमानुसार कार्यवाही की छूट दी। गत 8 सितंबर को जारी किए विचारण न्यायालय के आदेश को अपास्त कर दिया।



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The passport of the businessman was stopped in connection with the case of assault, the ADJ court gave permission, the monitoring petition was presented against the order of the Metropolitan Magistrate


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