साेजत में मिनी एयरपोर्ट का प्रस्ताव चार साल से अटका, अब नौजवान पायलटों के लिए फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल की कवायद

सब कुछ सही रहा तो सोजत में नौजवान पायलटों के लिए फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल खुल सकता है। मंगलवार को राजस्थान उड्डयन विभाग के अधिकारी हेलिकॉप्टर से सोजत हवाई पट्टी पर उतरे। करीब दो घंटे तक मौका मुआयना भी किया। कलेक्टर अंशदीप ने यहां पर उड़ान से संबंधित कुछ गतिविधियां शुरू होने की संभावनाओं पर हामी भरी है।

अपुष्ट सूत्रों से पता चला है कि एक बड़ा औद्योगिक समूह पश्चिमी राजस्थान में नया प्रोजेक्ट लाने के बारे में सोच रहा है। इसको लेकर पश्चिमी राजस्थान में हवाई सेवाओं को बढ़ाने के साथ छोटे विमानों की मरम्मत और रखरखाव के लिए कारखाना लगाने के बारे में सरकार से एमओयू किया है।

इसी के संबंध में अधिकारी सोजत पहुंचे। यहां पर अधिकारी के तौर दौलतराम चौधरी, डीएसपी डॉ. हेमंत जाखड़, थानेदार रामेश्वर भाटी, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता के. सुथार ने उनकी अगवानी की। हेलिकॉप्टर में राजस्थान उड्‌डयन विभाग के अधिकारी और बड़े व्यापारिक समूह के एक प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने सोजत हवाई पट्टी का निरीक्षण किया तथा प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा की।

अधिकारी 2 घंटे मौके पर रहे, फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल को लेकर स्थानीय अधिकारियों से की चर्चा

प्रोजेक्ट के तहत सार्वजनिक निर्माण विभाग रनवे के विस्तार के लिए करीब 100 गुणा 750 मीटर जमीन अधिगृहीत करने, 1100 के बजाय 1850 मीटर का नया रनवे बनाने, वीआईपी लॉन्ज, हैंगर, विमान उतारने के संसाधन, पार्किंग समेत सभी प्रकार के संसाधन को लेकर 61.19 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया था। यह प्रस्ताव राज्य सरकार को भी भेजा गया, लेकिन चार साल बाद भी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।

मिनी एयरपोर्ट बनाने को लेकर पूर्व में भेज रखा है 61 करोड़ का प्रस्ताव
सोजत हवाई पट्टी को मिनी एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने 4 साल पहले राज्य के नागरिक उड्डयन विभाग के निर्देशों के बाद यहां पर मध्यम श्रेणी के विमानों के उतरने अन्य सुविधाएं बढ़ाने के लिए 61.19 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेज रखा है। अधिकारियों के अनुसार राज्य के उड्डयन विभाग के निदेशक राज्य सरकार के हवाई बेड़े के मुख्य पायलट केसरीसिंह ने निरीक्षण किया था।

पीडब्ल्यूडी द्वारा पूर्व में भेजे प्रस्ताव ये भी थे शामिल

  • हवाईपट्टी को 1850 मीटर लंबी बनाने के प्रयास, ताकि 50 सीटर विमान भी आसानी से उतर सके।
  • फिलहाल इसकी चौड़ाई दोनों तरफ से साढ़े सात-साढ़े सात फीट यानी 5 मीटर बढ़ाकर 35 मीटर किया जाएगा।
  • यहां कॉमर्शियल उड़ानों की तैयारियों के तहत एक छोटा सा टर्मिनल बनाने का प्रयास।
  • चार-पांच छोटे विमानों को सुरक्षित खड़ा रहने के लिए एक सेफ हाउस का प्रस्ताव भी।

मिनी एयरपोर्ट बनता तो ये मिलता फायदा

  • पाली और उससे लगते जालोर, सिरोही जोधपुर जिले में करीब 2 लाख से ज्यादा प्रवासी रहते हैं दक्षिण में है, जिन्हें हवाई यात्रा के लिए जोधपुर, जयपुर या अहमदाबाद जाना पड़ता है।
  • पाली से दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर गुजर रहा है, मिनी एयरपोर्ट बनने से फायदा मिलेगा।
  • पाली में टैक्सटाइल इंडस्ट्री की 600 से ज्यादा यूनिट हैं, उद्यमी आते-जाते रहते हैं, वे भी मिनी एयरपोर्ट का फायदा ले सकते हैं। इसके अलावा जिले में सीमेंट की 4 फैक्ट्रियां भी है।
  • नजदीक में जोधपुर में वायुसेना का बेस है, जरूरत पड़ने पर छोटे लड़ाकू विमानों के लिए भी विकल्प मिल सकता है।

ये है स्थिति

2003 में बनी थी सोजत में हवाई पट‌्टी

1.03 करोड़ रुपए आई थी लागत

128 बीघा भूमि एयर स्ट्रिप के लिए

1170 मीटर लंबी और 30 मीटर चौड़ी

07 सीटर विमान यहां उतर सकते हैं मरम्मत के बाद



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सोजत हवाई पट्‌टी का निरीक्षण करने हेलिकॉप्टर से पहुंचे अधिकारी।


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