एमबीएस में सीवरेज टैंक चाेक होने पर सफाई कर्मचारियों को टैंक में उतारकर सफाई करवाई गई। कर्मचारी ने मैनुअली पूरे टैंक काे साफ किया। इस दाैरान सुरक्षा के नाम पर सफाईकर्मी के पास केवल हैंड ग्लब्ज ही थे। मास्क भी साधारण लगाए हुए थे। ये हालत तब है जब सफाई कर्मचारियाें काे सीवरेज टैंक में उतारने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयाेग और पिछले दिनाें मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत ने इस संबंध में सख्त आदेश जारी किए थे कि निगम अथवा किसी भी प्राइवेट फर्म, ठेकेदार द्वारा किसी भी सफाई कर्मचारी काे सीवरेज टैंक साफ करने के लिए नहीं उतारा जाएगा। इसकी सफाई मशीन से ही हाेगी। ऐसा करने पर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हाेगी।
नॉलेज : हर साल सीवर साफ करते हुए औसतन 29 सफाईकर्मियों की मौत होती है
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के मुताबिक 1993 से लेकर 2019 तक 774 सफाईकर्मियों की सीवर में उतरने से मौत हुई है। यानी हर साल 29 लोगों की मौत हुई। इसमें सबसे ज्यादा तमिलनाडु में 203, गुजरात में 145, उत्तर प्रदेश में 76, हरियाणा में 59, दिल्ली में 44 मौतें हो चुकी हैं। राजस्थान में इस दौरान 38 मौत हो चुकी हैं।
ये हैं नियम
- सीवरेज टैंक की सफाई सीवरेज मशीनाें से ही करवाई जाए।
- यदि बहुत ही आवश्यक हाे और मशीन वहां तक नहीं पहुंच पाए ताे सुरक्षा की पूरी व्यवस्था कर कर्मचारी काे टैंक में उतारा जाए।
- इसके लिए उसे ऑक्सीजन सिलेंडर, हेलमेट, गम बूट, ग्लब्ज उपलब्ध करवाकर अंदर उतारें। ऑक्सीजन सिलेंडर पर्याप्त क्षमता वाला हाे।
- फर्म अथवा संस्था का एक अधिकारी माैके पर उपस्थित रहकर सारी व्यवस्था की माॅनिटरिंग करेगा। एक कर्मचारी काे ज्यादा देर तक भीतर न रखा जाए।
- कर्मचारी को उतारने से पहले गैस डिटेक्टर से खतरे का पता लगाया जाए।
एमबीएस में सफाई की व्यवस्था किसकी है। इसका पता करवाकर जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई होगी। - उज्ज्वल राठाैड़, कलेक्टर
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