भाडखा निवासी भरत कुमार की पत्नी सायर ने तीन बेटियों का जन्म दिया। बालिका दिवस पर जिले में एक साथ तीन बेटियों के जन्म का यह पहला मामला है। जिला मुख्यालय पर स्थित शिवम हॉस्पिटल में सायर देवी की डिलेवरी हुई। तीनों बच्चियां स्वस्थ है। गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. राहुल बामनिया ने बताया कि सायरदेवी का छह माह से इसी अस्पताल से ट्रीटमेंट चल रहा था।
चार माह पहले ही उन्हें बता दिया था कि तीन संतानें होगी। रविवार सुबह आठ बजे प्रसव पीड़ा होने पर परिजन सायर को लेकर अस्पताल आए। तीन घंटों में सिजेरियन से प्रसव करवाया। सायर ने तीन बेटियों को जन्म दिया। तीनों का वजन 2 किलो हैं। मां व बच्चियां स्वस्थ्य है। उनके पहले एक बेटा व बेटी है।
दो से अधिक बच्चों के लिए सिजेरियन जरूरी
- आमतौर पर प्रसूता के एक या दो बच्चों की डिलेवरी सामान्य हो जाती है, लेकिन दो से अधिक संतान पर सिजेरियन से ही प्रसव करवाना होता है। खून की कमी या अन्य कोई तकलीफ नहीं होने पर डिलेवरी में कोई खतरा नहीं रहता है। प्रसूता का पहले से इलाज इसी अस्पताल से चल रहा था। एक साथ तीन बच्चियों को जन्म देने का पहला ही मामला है। दो बेटे व एक बेटी। या दो बेटियां व एक बेटे के जन्म के कई मामले आए हैं। बालिका दिवस पर तीन बेटियों का जन्म होना सुखद संयोग है। - डॉ. राहुल बामनिया, गायनोलॉजिस्ट, शिवम अस्पताल।
5 फीसदी अधिक बेटियों का जन्म
- जिला अस्पताल में साल में करीब दस हजार से अधिक प्रसव होते हैं। वर्ष 2020-21 में प्रसूताओं ने 55 फीसदी बेटियों का जन्म दिया और 45 फीसदी बेटे जन्में। यानी बेटों की तुलना में बेटियों की जन्म दर 5 फीसदी अधिक है। बीते तीन साल के आंकड़ों पर गौर करें तो बेटों के मुकाबले बेटियों की जन्म दर लगातार बढ़ रही है। यानी बेटे व बेटी का भेद अब खत्म हो चुका है। लोगों की सोच में दलाव से सुखद बदलाव सामने आ रहे हैं। - डॉ. हरीश चौहान, शिशु रोग विशेषज्ञ
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