भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया,कान्हड़दास धाम रामद्वारा में संत ने कहा-इच्छा ही मनुष्य के दुखों का कारण है

कान्हड़दास धाम रामद्वारा में भागवत कथा के दौरान गुरुवार को संत गोपाल रामजी महाराज ने कहा कि इच्छा ही मनुष्य के दुखों का कारण है। देश में बढ़ रही अशांति, अनाचार, अराजकता तथा असंतोष का समाधान केवल धार्मिक ग्रंथों में बताए मार्ग पर चलने से संभव है। भागवत हमें मर्यादा में रहने की प्रेरणा देता है। संत ने कहा कि भक्त प्रहलाद के जीवन में बहुत कष्ट था। पिता, भ्राता, पूरा परिवार और पूरी बिरादरी भागवत विमुख थी। केवल मां ही भगवत सुमिरन करती थी। किंतु बुरे लोगों के बीच रहकर भी प्रहलाद महान भक्त बने रहे। अजामिल भगवान के नाम से तर गया।

यदि संतान ईश्वर भक्त है तो वह अपने पूरे परिवार का उद्धार करा देती है।साधुओं के कहने से अजामिल ने अपने पुत्र का नाम नारायण रखा। अंत समय में अपने पुत्र नारायण को आवाज दी और नारायण का नाम लेने मात्र से अजामिल जैसे महापापी का उद्धार हो गया। भगवान के नाम की महिमा बताते हुए कहा कि कलयुग में अपने कल्याण का एक मात्र साधन हरि नाम है। हमें भगवान से भक्ति के अतिरिक्त और कुछ नहीं मांगना चाहिए। कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया।

भगवान श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का मंचन किया। इस दौरान पूरा सत्संग हॉल भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। भक्तजन गोकुल में आनंद भयो जय कन्हैयालाल की, हाथी घोड़ा पालकी की धुन गा रहे थे। इस दौरान बाल कृष्ण को पालकी में सिर पर धारण कर ले जाते वासु देवजी की जीवंत झांकी सजाई गई। नन्हें बच्चों ने ग्वालबाल की आकर्षक वेशभूषा पहनकर गोकुल-मथुरा सा माहौल बनाया। संत ने कथा में वर्णाश्रम व्यवस्था, गजेंद्र उपाख्यान, समुद्र मंथन, सूर्यवंश का वर्णन, श्रीराम और श्रीकृष्ण जन्म के प्रसंग विस्तार से सुनाए।

भारत शर्मा और संत पुनीत रामजी महाराज ने भजन सुनाए। इससे पूर्व पंडित जयदेव शुक्ला, संतोष पंचाल, ज्योत्सना पंड्या, सुधा गुप्ता, करुणा भट्ट, लक्ष्मी पंचाल, हेमा सुथार, अनीता सुथार, शकुंतला, ललिता सुधार, भूरी परमार, नाथू परमार, विनोद भट्ट के साथ ही रामद्वारा सत्संग सेवा समिति और महिला मंडल ने पोथी पूजन कर आरती उतारी।



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