अजमेर जिले के 9 बेजुबान बच्चों को मिली जुबान, अपने नाैनिहालों काे बाेलता व सुनता देख माताओं की आंखें भर आईं
भाई साहब क्या बताएं जन्म के तीन दिन बाद जब हमें पता चला कि हमारी लाडाे सुन व बाेल नहीं पाएगी, केवल इशारों से ही उसे समझाना पड़ेगा। जांच के दौरान चिकित्सक के यह बाेल हमारे परिवार पर किसी वज्रपात से कम नहीं थे। छह साल तक वह दूसरे बच्चों से एकदम अलग रही। एक अभिभावक काे दाे साल बाद पता चला कि उनके परिवार का चिराग बाेलने व सुनने में समर्थ नहीं है।
इन्हाेंने राजस्थान सरकार की कल्याणकारी याेजना के तहत बच्चों का रजिस्ट्रेशन कराया। गुरुवार काे सब पुराने दुख दूर हाे गए जब मां के लाडले ने कहा मां। जन्म से से मूक-बधिक बच्चे केवल बाेले ही नहीं बल्कि एक से दस तक गिनती तक सुना दी।
अजमेर जिले के 9 बच्चों के लिए गुरुवार काे जेएलएन अस्पताल का मैलोडी हाॅल उनके जीवन में सूर्य की एक नई किरण लेकर आया है। जाे बच्चे जन्म से सुन और बाेल नहीं पाते थे, वह अब आम बच्चों की तरह बाेलने व सुनने लगे हैं। गुरुवार दोपहर मैलोडी हाॅल में इन बच्चों काे ऑपरेशन के बाद पहली बार आमजन के सामने लाया गया। इन बच्चों काे स्पीच लेंग्वेज के जरिए अभी बाेलना व सुनना सिखाया जा रहा है। अपने बच्चों काे बाेलता देख कई मांओं के खुशी से आंसू छलक गए। यह जेएलएन के ईएनटी विभाग के चिकित्सकों के डेढ़ साल की अथक मेहनत का परिणाम है।
सात बच्चों को कॉकलियर इंप्लांट की मशीन लगाई, मशीनों काे जल्द ही चालू किया जाएगा
गुरुवार काे सबसे पहले गत वर्ष मार्च किशनगढ़ के देशवाली मोहल्ला और केकड़ी निवासी दाे बच्चों के ऑपरेशन हुए थे। आज दाेनाें ही बच्चे बाेल व सुन पा रहे हैं। गुरुवार काे सात बच्चों के कॉकलियर इंप्लांट की मशीन लगाई गई। इन मशीनों काे जल्द ही चालू किया जाएगा। गुरुवार काे सभागार में विभागाध्यक्ष डाॅ. बीके सिंह, पीसी वर्मा, डाॅ. दिग्विजय सिंह, डाॅ. योगेश आसेरी, डाॅ. विक्रांत शर्मा और टीम का सभी चिकित्सकों और लाेगाें ने ताली बजाकर स्वागत किया।
कार्यक्रम में प्रिंसिपल डाॅ. वीबी सिंह ने कहा कि सरकार ने 50 हजार तक की राशि और स्वीकृत की है, इस राशि से इंप्लांट की रिपेयरिंग हाे सकेगी। अधीक्षक डाॅ. अनिल जैन ने कार्यक्रम की जानकारी दी। बच्चों के लगाया गया कॉकलियर इंप्लांट स्पीच लेंग्वेज पैथोलॉजी का है। इसकी लागत 3.5 लाख रुपए है। प्रति ऑपरेशन पर पूरा खर्चा 4 लाख 42 हजार रुपए आता है।
अजमेर जिले का पहला मामला
किशनगढ़ के देशवाली मोहल्ला हाल खानपुरा निवासी मोहम्मद अली हसन चार साल का हाे गया। हसन जिले का पहला बच्चा है जिसे सबसे पहले काॅकलीट इंप्लांट लगा। मार्च 2019 काे यह लगाया गया था। दादा मोहम्मद इलियास ने बताया कि वह जयपुर तक गए। घर पर भी सब स्पीच लेंग्वेज सिखाने में उसके साथ मेहनत करते हैं।
खुशी का ठिकाना नहीं रहा| केकड़ी निवासी किरण सैनी का भी ऑपरेशन हुआ था। आज दाेनाें सुन व बाेल पा रहे हैं। पिता कन्हैयालाल और मां शांति देवी अपनी लाडाे काे बाेलता देख इन पलाें काे अपने में समेट लेना चाह रहे थे। सभी के सामने खड़े हाेकर लाडाे काे नया जीवन देने पर सबसे पहले आभार जताया।
ये भी बाेलेंगे
देवनगर निवासी प्रिया शील गुर्जर, नेहरू गेट बाहर जैन मंदिर निवासी केशव चाैधरी, बाघ सूरी निवासी हिफजुरहमान, अजय नगर निवासी दिव्या, बड़ी का बास नया शहर निवासी ईशा कुमावत, मालपुरा निवासी अर्पिता नागर और चौरसियावास राेड निवासी प्रज्ञांश गुर्जर।
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