हमारी आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है। हालात ऐसे ही रहे तो अब खाद्यान्न का उठाव संभव नहीं होगा। क्रय-विक्रय सहकारी समिति अभी तक 5 करोड़ से ज्यादा रुपए लगा चुकी है, लेकिन बिलों का भुगतान नहीं हाे रहा है। यह पत्र क्रय-विक्रय सहकारी समिति ने जिला रसद अधिकारी को लिखते हुए कहा है कि पैसा नहीं मिला तो काम करना मुश्किल हो जाएगा।
आपको बिलों के भुगतान के लिए 29 बार लिख चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। आपको बता दें कि सरकार की मुफ्त अनाज, दाल वितरण अाैर पोषाहार योजनाएं कभी भी संकट में आ सकती हैं। पिछले 7 दिनों से खाद्यान्न का उठाव बंद था, जो मंगलवार को 20 लाख रुपए का भुगतान हाेने के बाद शुरू हुआ है। क्रय-विक्रय सहकारी समिति के जीएम का कहना है 20 लाख से ज्यादा दिन काम नहीं चल पाएगा।
दरअसल मामला यह है कि लॉकडाउन के समय से लेकर अब तक केवीएसएस के जरिए लगातार खाद्यान्न का उठाव तो होता गया, लेकिन रसद विभाग ने बिलों का भुगतान अभी तक नहीं किया है। समितियों के 5 करोड़ 44 लाख रुपए के बिल अभी तक अटके हुए हैं। यदि यह पैसा नहीं मिला तो गरीब के निवाले पर संकट हो सकता है। सरकार की विभिन्न योजनाओं में बंटने वाले पोषाहार, खाद्यान्न, दाल आदि का उठाव क्रय-विक्रय सहकारी समितियों द्वारा किया जाता है।
इसके लिए समितियों द्वारा पहले पैसा एफसीआई या राज्य की एजेंसी काे जमा कराना होता है। पैसा जमा कराने के बाद माल का उठाव होता है। इसके बाद बिलों को भुगतान के लिए रसद विभाग में भेजा जाता है। इन बिलों में जमा कराए हुए पैसों के अलावा परिवहन व्यय और हैंडलिंग चार्ज भी शामिल होता है।
7 दिन बाद मंगलवार को शुरू हुआ उठाव : सूत्रों की मानें तो पैसा नहीं मिलने के कारण खाद्यान्न का उठाव पिछले 7 दिन से बंद था। मंगलवार को करीब 20 लाख रुपए का भुगतान होने के बाद यह उठाव दुबारा शुरू किया गया।
रसद विभाग के पास हमारा 5 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया चल रहा है। बिलों के भुगतान के लिए कई बार लिख चुके हैं। यदि पैसा नहीं मिला तो आगामी दिनों में माल का उठाव करना संभव नहीं होगा।
-गुलाबचंद मीणा, जीएम, केवीएसएस
केवीएसएस काे धीरे-धीरे भुगतान किया जा रहा है। जून तक का कर दिया गया है। पुराने बिल कार्यालय में ही नहीं हैं ताे भुगतान कैसे करें? मुझे तीन-चार दिन ही ज्वाइन किए हुए हैं। बाकी बिल बनवाकर भुगतान करवा रहे हैं। -अमृतलाल, जिला रसद अधिकारी
कहीं भारी नहीं पड़ जाए रसद अधिकारियों की कुश्ती
पूरे मामले में यह भी सामने आया है कि बिलों के भुगतान को लेकर विभाग के अधिकारी भी गंभीर नहीं है। पिछले कई दिनों से जिला रसद अधिकारी के पद पर कुश्ती जैसा माहौल चल रहा है। लगातार अधिकारियों के बदलने के कारण भी विभागीय कामकाज पर असर पड़ रहा है।
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