सरकार ने कलेक्टर से पूछा- क्या सच में ये बीमारियां इतनी ही हैं, या जांच नहीं हो पा रही?, 2019 में सितंबर तक- स्वाइन फ्लू के 795 डेंगू के 144 व मलेरिया के 2270 केस थे

काेराेनाकाल में सरकार और सारी मशीनरी महामारी से संघर्ष में उलझी हुई है। पिछले छह माह से पूरा मेडिकल सिस्टम कोरोना के अलावा कुछ देख नहीं पा रहा। सीजन डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू व चिकनगुनिया जैसी बीमारी का भी आ गया है। लेकिन इन बीमारी के केस नजर नहीं आ रहे। ऐसे में सरकार जागी है।

कलेक्टर्स को पत्र लिखकर पूछा है कि क्या ये मौसमी बीमारियां इतनी ही हैं या इनकी जांच ही नहीं हो रही। सरकार ने जोधपुर कलेक्टर को पत्र में पिछले साल सितंबर तक इन बीमारी के मरीज और इस साल अब तक सामने आए केस की तुलना करके भी भेजी है। कोरोना संक्रमित मरीजों व उनकी मौत के आंकड़ों में तो स्थानीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक गफलत है ही, अब मौसमी बीमारियों के आंकड़ों में भी सरकारी विभाग और अफसर सही आंकड़ों से अनजान बने हुए हैं।

दरअसल, मानसून खत्म होने और मौसम में परिवर्तन शुरू होने के साथ मच्छरों व अन्य संक्रमण वाली बीमारियां बढ़ने लगती हैं। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते दूसरी बीमारी सामने दिख नहीं रही है। ना सरकारी रिकाॅर्ड में इनके आंकड़े पिछले साल जितने नजर आ रहे हैं। ऐसे में प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोड़ा ने कलेक्टर्स का ध्यान इन बीमारियों पर दिलाया है।

अरोड़ा की मानें तो जोधपुर में स्वाइन फ्लू के अब तक 04, डेंगू के 03 व मलेरिया के 07 केस सामने आए हैं। उनके अनुसार ही 2019 में सितंबर तक स्वाइन फ्लू के 448, डेंगू के 131 व मलेरिया के 90 केस आ चुके थे।
बुखार आने पर काेराेना टेस्ट हाे रहे, डेंगू के नहीं
पिछले व इस साल के आंकड़ों में इतने अंतर पर ही यह सवाल किया है। यह अलग बात है कि अगर प्रमुख शासन सचिव के पास पिछले साल के वास्तविक आंकड़े होते तो वे सवाल करने की जगह प्रशासन व चिकित्सा महकमे की कार्यप्रणाली की ही जांच करवा लेते। शहर के बासनी व झालामंड इलाके में कुछ निजी चिकित्सकों ने बुखार व प्लेटलेट कम होने पर जांच करवाई तो 10 से ज्यादा मरीजाें में डेंगू के लक्षण मिले।

इधर, एम्स में डेंगू का एक मरीज अभी भर्ती है। पिछले सप्ताह दो थे तो दो महीने में डेंगू के करीब 10 के अंदर मरीज आए हैं। वहीं एमडीएम में एक मरीज प्राइवेट अस्पताल से डेंगू केस के रूप में रेफर होकर आया था। यहां जांच की तो वह निगेटिव निकला। मरीजों की सही संख्या कम सामने आने का एक कारण यह भी है कि बुखार आने पर कोरोना का सैंपल करवाया जा रहा है, डेंगू के टेस्ट ही कम हो रहे हैं।

बीमारी के आंकड़ाें में ही गफलत
इस आधार पर कैसे हाे राेकथाम
सरकार ने 2019 के सितंबर तक डेंगू के 131, स्वाइन फ्लू के 448, मलेरिया के 90 केस बताए, जबकि ये क्रमश: 144, 795 थे। वर्ष 2019 में जोधपुर में डेंगू के 2270 मामले सामने आए थे व नौ मौत हुई थी।

  • दूसरी बड़ी बीमारी स्वाइन फ्लू थी, जिसके सितंबर तक 795 केस और 69 मौत दर्ज हुई थी।
  • इसके अलावा टायफायड के 804 मरीज संक्रमित हो चुके थे तो मलेरिया के महज 20 मरीज ही सरकारी रिकार्ड में दर्ज हुए थे।
  • इन बीमारी के आंकड़ों को भी कोरोना हो गया है। वह इसलिए कि स्थानीय स्तर पर संधारित आंकड़े, सरकार के पास उपलब्ध आंकड़े और वास्तविक आंकड़ों में काफी अंतर है।
  • सरकार मलेरिया के 90 मरीज पिछले साल के बता रही है। स्थानीय आंकड़ों व सरकार के आंकड़ों में 70 मरीज का अंतर है।
  • सरकार के पास बीमारी के हिसाब-किताब में स्वाइन फ्लू के 347 मरीजों के आंकड़ों की गफलत बनी हुई है। इन आंकड़ों से ही बीमारियों के रोकथाम की रणनीति बनती है।

नियंत्रण के लिए अभी से जागने के निर्देश
प्रमुख शासन सचिव ने कलेक्टर से कहा है कि वे अभी से स्वाइन फ्लू, स्क्रब टायफस, डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया बीमारियों की समुचित जांच कराना सुनिश्चित कराने के साथ नियंत्रण के लिए एंटी लार्वल व एन्टीएडल्ट गतिविधियां शुरू कर दें। पिछले साल जब सितंबर खत्म होते ही डेंगू व स्वाइन फ्लू ने विकराल रूप लिया था तो इन बीमारी के लिए फील्ड में मेडिकल टीमें नजर आनी शुरू हो गई थीं।



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स्वाइन फ्लू के अब तक 04, डेंगू के 03 व मलेरिया के 07 केस


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