अब पीने के पानी की बर्बादी या दुरुपयोग करना दंडनीय अपराध हो गया है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (सीजीडब्ल्यूए) ने इस संबंध में पब्लिक नोटिस जारी किया है। आदेश में भूजल संसाधनों का दोहन कर निकाले गए पेयजल की बर्बादी के लिए सजा का प्रावधान है। नियमों के अनुसार यह 5 साल की जेल या एक लाख रुपए का जुर्माना या फिर दोनों हो सकते है।
सीजीडब्ल्यूए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अधीन आता है। पेयजल सप्लाई में लगी पीएचईडी, जल बोर्ड, निगम, पंचायत या अन्य कोई निकाय को पीने के पानी की बर्बादी रोकने के लिए उपाय करने होगी। इसके लिए सिस्टम भी तैयार करना होगा। राजस्थान में सीजीडल्यूडी के रीजनल डायरेक्टर एसके के जैन का कहना है कि सीजीडब्ल्यूए ने पेयजल की बर्बादी रोकने के लिए आम सूचना जारी की है। इसकी पालना करवानी की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की है। इस पब्लिक नोटिस की स्टडी की जा रही है।
यह है सीजीडब्ल्यूए का पब्लिक नोटिस
आदेश जारी होने की तारीख से जल बोर्ड, जल निगम, वाटर वर्कर्स डिपार्टमेंट, नगर निगम, नगर पालिका, विकास प्राधिकरण, पंचायत या किसी भी अन्य जो पेयजल सप्लाई संभालता है, यह सुनिश्चित करेंगे कि भूजल से मिलने वाले पेयजल की बर्बादी नहीं हो। इस आदेश की पालना करने के लिए एक सिस्टम विकसित करेंगे और आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक उपाय किए जाएंगे। कोई भी व्यक्ति भू-जल स्रोत से हासिल पीने का पानी (पोटेबल वाटर) की बर्बादी नहीं कर सकता है।
एनजीटी के आदेश के बाद हरकत में आया प्राधिकरण
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पिछले साल अक्टूबर में पानी की बर्बादी रोकने की मांग वाली याचिका की सुनवाई की थी। उस मामले में एनजीटी के आदेश की पालना करते हुए सीजीडब्ल्यूए ने यह आदेश जारी किया है।
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