शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं में सरकार फेल, माध्यमिक और प्रारंभिक डीईओ, 17 में से 9 ब्लॉक में सीबीईओ के पद खाली
जिले में 4 लाख 5 हजार छात्रों और 18 हजार 417 शिक्षकों वाले शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं में सरकार फेल हो रही है। महकमा अतिरिक्त जिम्मेदारियों के भरोसे है। समय पर डीपीसी नहीं होने से विभागीय ढांचा ही चरमरा गया है। डीईओ माध्यमिक हो या प्रांरभिक, दोनों विभाग के मुखिया की कुर्सियां खाली हैं। एक साल से संयुक्त निदेशक का काम खुद सीडीईओ शिवजी गौड़ के जिम्मे है। यही नहीं, 17 में से 9 ब्लॉक में सीबीईओ के पद भी खाली हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) का पद खाली होने के साथ ही महकमे के कामकाज बेपटरी हो रहे हैं। डीईओ का पद संभाल रहे भरत जोशी की पदोन्नति पर हाल ही आरएससीईआरटी के उपनिदेशक पद पर होने के बाद डाइट प्रिंसिपल पुष्पेंद्र शर्मा को अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
दो साल से डीईओ (प्रारंभिक) का पद भी खाली है। इसका कामकाज भी डाइट प्रिंसिपल को देखना है। विभाग की तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां इन्हीं पर हैं। ब्लॉक आफिस की स्थिति और भी खराब है। जिले के 17 ब्लॉक में महज 8 ब्लॉक में ही मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नियुक्त हैं।
बड़ा सवाल : कामकाज की फेहरिस्त लंबी, कैसे होगी मॉनिटरिंग?
1. प्रारंभिक और माध्यमिक डीईओ के अधीन शहर की स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था देखने के साथ निदेशालय के आदेश की पालना भी करवानी होती है। करीब 7 हजार से ज्यादा तृतीय ग्रेड शिक्षकों से जुड़े मामले देखने होते हैं। बार-बार शिक्षकों की ओर से समस्या बताने के बाद स्थायीकरण की मांग भी लंबित है। भर्ती के बाद कार्मिकों की काउंसलिंग की जिम्मेदारी भी विभाग की है।
2. संयुक्त निदेशक का पद 1 साल से खाली है। सीडीईओ को इसका प्रभार दिया गया है। करीब 11 हजार ग्रेड सेकंड शिक्षकों की काउंसलिंग और दूसरे काम इसी विभाग को देखने होते हैं। सीडीईओ के पास ही समसा के समन्यवक का काम भी होता है।
3. डाइट प्रिंसिपल की बात करें तो दो डीईओ का पद संभालने वाले प्रिंसिपल डाइट में होने वाले प्रशिक्षण सहित अन्य गतिविधियों की मॉनिटरिंग भी करते हैं।
कामकाज प्रभावित हो रहे
डीपीसी से पदोन्नति समय पर नहीं होने के कारण 50 फीसदी पद खाली हैं। ऐसे में कर्मचारियों के कई काम समय पर नहीं हो पा रह। शैक्षिक गतिविधियों का प्रभावी निरीक्षण भी नहीं हो रहा है। -शेर सिंह चौहान, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष, शिक्षक और पंचायती राज कर्मचारी संघ
पद के लिए डीपीसी होनी है। यह राज्य स्तर का मामला है। डीपीसी के लिए लिस्ट निदेशालय को जारी करनी है। -शिवजी गौड़, संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा)
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