भाजपा सिर्फ 17 बागियों को राजी कर पाई, 23 कार्यकर्ता अब भी मैदान में, बागियाें काे मनाने में बीजेपी बुरी तरह फेल साबित हुई है

नगर निगम चुनाव में बागियाें काे मनाने में बीजेपी बुरी तरह फेल साबित हुई है। दो दिन तक ताबड़तोड़ बैठकों के बाद भी दोनों निगम में करीब 23 बागी मैदान में डटे रह गए। असल में दोनों निगमों में यूं तो बीजेपी के करीब 60 बागी मैदान में थे, लेकिन इनमें से 40 प्रत्याशियों को लेकर पार्टी का मानना था कि ये अधिकृत प्रत्याशियों को अच्छा-खासा नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनमें से भी 8-10 बागियों पर ज्यादा फोकस था।

लेकिन जिन पर ज्यादा फोकस था, इनमें से एक ने भी नाम वापस नहीं लिया। 17 नाम वापस हो पाए, ये भी ज्यादा वोट काटने की स्थिति में नहीं हैं। पार्टी नेताओं के पास फीडबैक आया तो खलबली मच गई। पूरी स्थिति पर प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां भी निगाह बनाए हुए हैं। इनमें दो तो पूर्व पार्षद हैं, जो पिछली बार अच्छे वोटों से जीतकर आए थे। इनमें उत्तर के वार्ड-50 से राकेश पुटरा और दक्षिण के वार्ड-31 से ओम गुंजल के नाम शामिल हैं।

ये बागी डटे रह गए

काेटा उत्तर : वार्ड 50 से राकेश पुटरा, वार्ड 15 से इरशाद अली, वार्ड 47 से जतिन लाेधा, वार्ड 70 से बीरबल लाेधा, वार्ड 24 से रितू कंवर, वार्ड 26 से सुनील शर्मा, वार्ड 59 से कमलेश, वार्ड 17 से ईना मीणा, वार्ड 19 से विशाल और वार्ड 49 से बलविंद्र के अलावा कुछ अन्य बागी भी मैदान में डटे हुए हैं।
काेटा दक्षिण : वार्ड 42 से खेमचंद शाक्यवाल, वार्ड 67 से भानुप्रताप, वार्ड 68 से सुनील गाैतम, वार्ड 17 से जयराज सिंह, वार्ड 6 से नरेश, वार्ड 9 से अनिता, वार्ड 31 से ओम गुंजल, वार्ड 38 से महावीर नागर, वार्ड 33 से रीना, वार्ड 55 से छाेटी बाई, वार्ड 36 से सुरेंद्र नागर, वार्ड 53 से बलराम और वार्ड 4 से हरिओम स्वामी समेत अन्य बागी मैदान में डटे हुए हैं।



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दो दिन तक ताबड़तोड़ बैठकों के बाद भी दोनों निगम में करीब 23 बागी मैदान में डटे रह गए


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