कोरोना महामारी के इस दौर में भी अपनी लंबित मांग 35 हजार रुपए प्रति माह मानदेय देने की मांग नहीं मानने पर प्रदेश सरकार से खपा हुए आरएनटी मेडिकल कॉलेज के करीब 150 इंटर्न डॉक्टर्स शनिवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए।
स्टूडेंट वेलफेयर काउंसिल के अध्यक्ष लोकेश बुनकर ने बताया कि कोरोना महामारी में भी इंटर्न डॉक्टर संक्रमितों-संदिग्धों के जांच-उपचार से संबंधित कामों में जुटे रहते हैं, फिर भी प्रदेश सरकार मानदेय प्रतिदिन सिर्फ 233 रुपए ही दिया जाता है। जो अकुशल मजदूर से भी कम है। अब जब तक मांग नहीं मानी जाएगी तब तक इंटर्न डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे। स्टूडेंट वेलफेयर काउंसिल ने आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक भवन के बाहर जुटकर विरोध भी जताया।
कॉलेज मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डाॅ. लाखन पोसवाल ने कहा है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 के तहत कोई भी कार्मिक कोरोना महामारी के दौरान अपने दायित्व का निर्वहन करने से इनकार करता है तो एक साल के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। अगर किसी की जान जोखिम में पड़ती है तो दो वर्ष के साधारण कारावास एवं जुर्माना हो सकता है।
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