कोटा में दाे नगर निगम बनने के लगभग 11 महीने बाद भी दाेनाें निगमाें की व्यवस्था अलग नहीं हाे पाई है। पिछले साल नवंबर के अंतिम हफ्ते में ये तय हाे गया था कि माैजूदा भवन में ही दाेनाें निगम चलेंगे। इसके लिए काफी वक्त भी मिला, लेकिन निगम के अधिकारियाें की लापरवाही से ये काम अभी तक पूरा ही नहीं हाे सका है।
अब चुनाव की घाेषणा हाेने के बाद जल्दबाजी में इसका काम शुरू हुआ है, लेकिन 1 महीने में कैसे पूरा हाेगा ये तय नहीं है। इससे पहले दाेनाें निगमाें के कर्मचारियाें का बंटवारा भी काफी मशक्कत के बाद हाे सका था। जुलाई में दाेनाें निगमाें में अलग-अलग काम शुरू कर दिया था, लेकिन कई बार लिस्ट बदलने के बाद पिछले महीने ही कर्मचारियाें का बंटवारा हाे सका।
इस बार सरकार ने काेटा, जयपुर और जाेधपुर में दाे-दाे नगर निगम बना दिए हैं। इसकी घाेषणा पिछले साल ही हाे गई थी। काेटा के माैजूदा भवन में ही दाेनाें निगमाें का ऑफिस बनना था। निगम भवन में सीएडी चाैराहे वाली साइड में काेटा उत्तर और दशहरा मैदान की तरफ दक्षिण का ऑफिस हाेगा। लेकिन इतने समय बाद भी दाेनाें निगम के भवन का बंटवारा नहीं हाे सका है। अभी तक दक्षिण निगम के महापाैर, उपमहापाैर, नेता प्रतिपक्ष, आयुक्त व एसई के चैंबर तैयार नहीं हाे पाए।
महापाैर का वर्तमान ऑफिस उत्तर के लिए तय किया है, लेकिन उसका फर्नीचर दीमक खा गई। अब नए फर्नीचर का काम करवाया जा रहा है। अब चुनाव कार्यक्रम तय हाे चुका है और निगम के पास समय ही नहीं बचा है। 3 नवंबर काे चुनाव परिणाम आ जाएंगे, 10 और 14 नवंबर काे महापाैर-उपमहापाैर बन जाएंगे।
इन्वेस्टिगेशन: जनवरी में 2 कराेड़ का बजट मिला, फिर भी काम टालते रहे अफसर
निगम के बंटवारे में अफसरों ने शुरू से ही लापरवाही बरती। हर काम काफी धीमी गति से किया। भवन काे दाे पार्ट में करने के लिए नगर निगम ने जनवरी में ही 2 कराेड़ रुपए का एस्टीमेट तैयार कर लिया था। इसमें 1 कराेड़ का फर्नीचर वर्क तथा 1 कराेड़ का सिविल व पार्टिशन वर्क करवाया जाना था। पहले टेंडर में लेटलतीफी की। टेंडर जारी हुए ताे लाॅकडाउन लग गया। लंबा समय लाॅकडाउन में निकल गया।
अनलाॅकडाउन के बाद टेंडर करवाए गए। उसके बाद भी अफसराें ने ये साेचकर काम में लापरवाही बरती कि अभी चुनाव ताे हाेने नहीं हैं। हाईकाेर्ट ने चुनाव के लिए 31 अक्टूबर की तारीख तय कर दी तब जाकर अफसर जागे और काम में तेजी आई। अब संडे काे भी काम करवाया जा रहा है।
कर्मचारियाें की तलाश में भटकते रहते हैं लाेग
सबसे खराब स्थिति प्रशासनिक व मंत्रालयिक कर्मचारियाें की है। दक्षिण के प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारियाें काे मेला प्रकाेष्ठ के हाॅल में बैठाया गया है। कुछ कर्मचारी पुराने स्थान पर ही बैठते हैं। भवन के दाे प्रवेश द्वार पर उत्तर-दक्षिण के बाेर्ड लगे हैं, लेकिन अंदर पता नहीं चलता कि काैन सा हिस्सा किसका है। उत्तर के कर्मचारी कहां मिलेंगे और दक्षिण में काम करवाने के लिए कहा जाना है। न काेई बाेर्ड लगाया गया है न ही काेई लिस्ट है कि काैन सा कर्मचारी कहां बैठा है।
केवल हाॅल तैयार हैं, चैंबर बनाना अब शुरू किया
नगर निगम भवन में 3 ब्लाॅक ए, बी व सी काे मिलाकर दाेनाें नगर निगम के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं तय की गई थीं। माैजूदा सेटअप का काफी हिस्सा काेटा उत्तर नगर निगम काे दिया गया। महापाैर के पुराने चैंबर में दीमक लग गई। इतने समय से बंद रहने के कारण दीमक वूडन वाॅल, आलमारियां व अन्य फर्नीचर चट कर गई। अब पुराने फर्नीचर काे हटाकर पेस्ट कंट्राेल कर नया फर्नीचर बनवाया जा रहा है।
दक्षिण निगम के हिस्से में बड़े-बड़े हाॅल आए, जिनकाे ताेड़कर महापाैर, उपमहापाैर, नेता प्रतिपक्ष, आयुक्त, उपायुक्त, एसई व कर्मचारियाें के कमरे तैयार किए जा रहे हैं। पहले जाे पार्षदाें के लिए वेटिंग हाॅल था उसे दक्षिण के महापाैर के लिए, हैल्पलाइन के ऊपर के हाॅल में दक्षिण के आयुक्त के चैंबर के लिए तैयार किया जा रहा है। दक्षिण के उपमहापाैर के लिए नेता प्रतिपक्ष के पुराने चैंबर काे तैयार किया जा रहा है, हैल्पलाइन काे छाेटा कर दक्षिण के नेता प्रतिपक्ष का चैंबर बनेगा।
स्मार्ट सिटी के मीटिंग हाॅल में दक्षिण के एसई का चैंबर बनाया जा रहा है। उत्तर के नेता प्रतिपक्ष के लिए अभी जगह भी डिसाइड नहीं हाे पाई है। दाे स्थानाें काे लेकर कंन्फ्यूजन चल रहा है कि पूर्व उपमहापाैर के पीए वाला रूम तैयार करवाया जाए या पूर्व महापाैर के चैंबर के सामने स्थित उनके मीटिंग हाॅल काे नेता प्रतिपक्ष का चैंबर बनाया जाए। तय हाेने के बाद उसका काम शुरू करवाया जाएगा।
जनप्रतिनिधियाें व अधिकारियाें के चैंबर का काम चल रहा है। सबसे पहले महापाैर व उपमहापाैर के चैंबर का काम करवाया जा रहा है ताकि निर्वाचित हाेते ही उन्हें चैंबर मिल जाए। साथ ही अधिकारियाें के चैंबर का काम भी चल रहा है। - वासुदेव मालावत, आयुक्त, उत्तर नगर निगम
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