एक मशीन के अभाव में जिला अस्पताल की ब्लड कंपोनेंट यूनिट 1 साल से अटकी, बाहर एसडीपी लेने पर खर्चे होते है ~ 9500
महज एक मशीन के अभाव में जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की ब्लड कंपोनेंट यूनिट (ब्लड सेपरेटर यूनिट) एक साल से अधर में है। एक साल से 20 लाख रुपए की मशीनें पड़ी हैं। कंपाेनेंट यूनिट के न चलने से डेंगू के प्रकोप के दौरान रोगियों को बाहर प्राइवेट ब्लड बैंक से सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) लेने पर 8 हजार से 9500 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। अगर सरकारी अस्पताल में मशीनें शुरू हो जाएं तो रोगियों को एसडीपी और आरडीपी िनशुल्क मिल सकती है। इन दिनों में डेंगू का प्रकोप चरम है। सरकारी अस्पताल में हुए एलाइजा टेस्ट में पिछले एक सप्ताह में 8 नए डेंगू रोगी मिले हैं।
मामला कोर्ट में विचाराधीन, इसी वजह से अटकी यूनिट
जिला अस्पताल में खून से एसडीपी, आरडीपी और प्लाज्मा अलग करने के लिए ब्लड कंपोनेट यूनिट शुरू होना एक साल से प्रस्तावित है। इसके लिए फेरेसिस मशीन, माइनस 40 और माइनस 80 डिग्री सेल्सियस के दो डीप फ्रिजर, आरडीपी और प्लाजमा अलग करने के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए उपयोग में आना वाला लेमिनार एयरफ्लो व ब्लड डोनर्स के लिए चेयर एक साल पूर्व उपलब्ध करवा दी गई थी। अब रेफ्रिजरेटेड
सेंट्री फ्यूग मशीन की ही जरूरत है जो सरकार की ओर से उपलब्ध नहीं करवाई गई है। पुराना ब्लड बैंक और ट्रेंड स्टाफ होने पर भी एक मशीन के अभाव में ब्लड कंपोनेंट यूनिट के लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया जा रहा है। पीएमओ डॉ. केएस कामरा के अनुसार मशीनों की सप्लाई के संबंध में रेट कांट्रेक्ट का लेकर दो फर्मों में विवाद है। ये मामला कोर्ट में विचाराधीन है, जिसे स्वास्थ्य निदेशालय ही देख रहा है। ब्लड कंपोनेंट यूनिट शुरू करने के लिए कई बार निदेशालय को रिमांइडर लेटर भेजा जा चुका है।
संकट: अब रोजाना 30 यूनिट एसडीपी और 100 यूनिट आरडीपी की खपत
डेंगू रोगी बढ़ने से इन दिनों में रोजाना 30 यूनिट एसडीपी और करीब 100 यूनिट आरडीपी की खपत हो रही है। प्राइवेट बैंक से एक यूनिट एसडीपी लेने पर 8 हजार से 9500 रुपए और एक यूनिट आरडीपी लेने पर 400 रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
चिंता: डेंगू के ज्यादा फैलाव की आशंका, हर वार्ड में युद्धस्तर पर फोगिंग की जरूरत
डॉक्टर्स के अनुसार डेंगू का वायरस संक्रमित व्यक्ति को काटने वाले मच्छर से ही अन्य व्यक्तियों में फैलता है। डेंगू रोगियों की संख्या ज्यादा होने और मच्छरों का प्रकोप बरकरार होने की वजह से डेंगू का संक्रमण ज्यादा फैलने की आशंका है। इसे रोकने के लिए प्रभावी तरीके से मच्छरनाशक दवा की फोगिंग करवाई जानी चाहिए। डाॅक्टर्स के अनुसार अगले महीने ठंड बढ़ेगी। मौसम मच्छरों के प्रतिकूल बनेगा जो डेंगू के नियंत्रण में मददगार साबित होगा।
सावधानी: डेंगू के लक्षण होने पर उपचार करवाएं, तरल पदार्थ ज्यादा सेवन में लें
डॉक्टर्स के अनुसार डेंगू के लक्षण होने पर तुरंत जांच करवाकर इलाज करवाना चाहिए। बुखार होने पर सामान्य पैरासिटामोल लेना चाहिए। पानी व अन्य तरह का तरल खाना ज्यादा लेना चाहिए। इसके अलावा मच्छरों का प्रकोप खत्म करना चाहिए।
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