वेद ही हैं भारतीय आस्तिक दर्शन शास्त्रों का मूल: योगेश्वरानंद

हरिशेवा उदासीन आश्रम में अधिक मास अनुष्ठान के तहत पुरुषोत्तम कथा के दूसरे दिन व्यासपीठ से स्वामी योगेश्वरानंद ने कहा कि सनातन धर्मावलंबियों की संस्कृति एवं सभ्यता वेद एवं वेद मूलक शास्त्रों पर अवलंबित है। भारतीय आस्तिक दर्शन शास्त्रों का मूल वेद है। पुराणों के अंतर्गत वृहद नारदीय पुराण तथा पदम पुराण पुरुषोत्तम कथा को प्रस्तुत करते हैं। इसके माध्यम से पतित से पतित व्यक्ति को आत्म उत्थान का रास्ता प्राप्त होता है। व्यासपीठ से नैमीषारण्य तीर्थ में हजारों वर्षों तक चलने वाले ज्ञान सत्र में उपस्थित ऋषियों का उल्लेख करते हुए प्रवर्तित दर्शन शास्त्र पर उन्हाेंने व्याख्यान दिया।

इससे पहले मंडल पूजन, अभिषेक, हवन यज्ञ, गोपाल सहस्त्रनाम पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम पाठ, श्री सूक्त पाठ, नारायण कवच, गीता पाठ हुए। शाम काे भागवत कथा राजा परीक्षित का जन्म, कलयुग का प्रवेश, भगवान कपिल की कथा पर उद्बाेधन हुआ। सनातन सेवा समिति के महासचिव अशोक मूंदड़ा एवं सचिव महेशचंद्र नरवाल ने आरती की। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने बताया कि धार्मिक अनुष्ठान एवं विविध कार्यक्रम का सोशल मीडिया पर प्रसारण हो रहा है।



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Vedas are the origin of Indian believer philosophies: Yogeshwarananda


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